Sudhanshu Trivedi ने Congress को घेरा, ‘Dimagi Naxal’ टिप्पणी पर उठाए सवाल

रविवार को बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Sudhanshu Trivedi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर चल रही राजनीतिक बहस को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने नक्सलवाद पर पार्टी का रुख़ पूछा और इस ख़तरे के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने आकलन का ज़िक्र किया।

Sudhanshu Trivedi ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में एक अहम मुद्दा उठाया था और भाषण के 24 घंटे के भीतर ही कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयानों पर हैरानी जताई।

Sudhanshu Trivedi ने कहा, “पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘दिमागी नक्सल’ का बहुत अहम मुद्दा उठाया था। हमें हैरानी है कि इसके 24 घंटे के भीतर ही कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।”

BJP प्रवक्ता ने Manmohan singh के 2006 के बयान का किया जिक्र, नक्सलवाद को बताया था बड़ी चुनौती

इसके बाद बीजेपी प्रवक्ता ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के एक बयान का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की एक बड़ी चुनौती बताया था।

Sudhanshu Trivedi ने कहा, “मैं कांग्रेस और पी. चिदंबरम को याद दिलाना चाहता हूं कि 13 अप्रैल 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था, ‘यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नक्सलवाद की समस्या हमारे देश के सामने अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है’।”

दोनों बयानों में अंतर बताते हुए Sudhanshu Trivedi ने कांग्रेस से सवाल किया कि वह किस आकलन को सही मानती है।उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं – कौन सही था, डॉ. मनमोहन सिंह या पी. चिदंबरम?

ये बातें तब सामने आईं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में नक्सलवाद को खत्म करने की सरकार की कोशिशों के बारे में बात की और ‘नक्सली मानसिकता’ के बारे में चेतावनी दी।

मोदी ने कहा कि भले ही हथियारबंद नक्सलवाद से निपट लिया गया है, लेकिन देश को उन लोगों से भी सावधान रहने की ज़रूरत है जो उनके अनुसार, दूसरे तरीकों से भारत को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री की इन बातों के बाद राजनीतिक बहस छिड़ गई है, जिसमें विपक्ष के नेता इस शब्दावली और आलोचकों व असहमति रखने वालों के प्रति सरकार के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

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BJP ने PM Modi के बयान का किया बचाव, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जोड़ा मुद्दा

वहीं, बीजेपी ने मोदी की बातों का बचाव किया है और इस मुद्दे को आंतरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और वैचारिक चुनौतियों पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बताने की कोशिश की है।

Sudhanshu Trivedi की टिप्पणियों में खास तौर पर पिछली कांग्रेस-नीत UPA सरकार द्वारा नक्सलवाद पर अपनाए गए रुख का ज़िक्र किया गया। मनमोहन सिंह के 2006 के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस आज भी इस खतरे को लेकर वही नज़रिया रखती है।

दिमागी नक्सल’ शब्द पर यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब सरकार वामपंथी उग्रवाद से निपटने पर लगातार ज़ोर दे रही है। हाल के वर्षों में केंद्र और सुरक्षा बलों ने हथियारबंद माओवादी समूहों के खिलाफ़ अभियानों और नक्सली हिंसा के दायरे को कम करने की कोशिशों पर ज़ोर दिया है।

Sudhanshu Trivedi के बयान ने स्वतंत्रता दिवस की बहस में एक नया राजनीतिक पहलू जोड़ दिया है; BJP कांग्रेस की मौजूदा प्रतिक्रिया की तुलना उसकी अपनी पिछली सरकार के नेताओं के बयानों से करके अंतर दिखाना चाहती है।

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कांग्रेस ने ‘दिमागी नक्सल’ जैसे लेबल के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार से असहमति या उसकी नीतियों पर सवाल उठाने को उग्रवाद के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

वहीं, बीजेपी का कहना है कि यह शब्द ऐसे लोगों या वैचारिक नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो उसके अनुसार परोक्ष रूप से देश-विरोधी नैरेटिव का समर्थन या प्रचार करते हैं।

उम्मीद है कि यह बहस आगे भी जारी रहेगी, क्योंकि राजनीतिक पार्टियां प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषण और इस व्यापक सवाल पर चर्चा कर रही हैं कि भारत को सशस्त्र उग्रवाद और वैचारिक चुनौतियों से कैसे निपटना चाहिए।

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