शुक्रवार, अक्टूबर 22, 2021
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Farmers Protest: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बातचीत से निपटाए मसला, एक कमिटी का गठन हो।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि किसानों और उनके संगठनों की एक कमिटी का गठन किया जाएगा। सरकार के नामित व्यक्ति भी होंगे। ये मामला राष्ट्रीय महत्व का बन गया है और इसे बातचीत से हल किया जाना जरूरी है।

New Delhi: Farmers Protest के कारण दिल्ली बॉर्डर बंद किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (SC Hearing Today) ने केंद्र, दिल्ली, यूपी, हरियाणा व पंजाब को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट व दो अन्य की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया कि बॉर्डर सील कर दिया गया है। शाहीनबाग केस में दिए फैसले का हवाला देकर कहा गया है कि वहां से किसानों को हटाया जाना चाहिए और बॉर्डर खाली कराया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि दिल्ली के आसपास के किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) जल्दी ही राष्ट्रीय मुद्दा बन जाएगा और ऐसे में अदालत चाहती है कि एक कमिटी का गठन हो जो दोनों पक्षों के बीच बातचीत से मामले को निपटाए।

Farmers Protest को लेकर आपसी बातचीत से निपटाएं मामला

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस ए बोबडे (Chief Justice of India SA Bobde) ने सवाल किया कि आप बॉर्डर ओपन कराना चाहते हैं। याची ने कहा कि इस मामले में नोटिस जारी होना चाहिए। कोर्ट ने याची से कहा कि आप किसानों के संगठन को भी पार्टी बनाएं। हम नहीं जानते कि कौन से संगठन हैं। एडवोकेट जीएस मनी ने इस दौरान कहा कि इस मामले में आपसी बातचीत से मामले को निपटाया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ज्यादातर अर्जी सही तरह से नहीं रखा गया है।

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क्या किसानों को दिल्ली आने से रोका गया है?

चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) से कहा है कि किसने किसानों को दिल्ली आने से रोका है। क्या आपने रोका है? तब तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोक रखा है। तुषार मेहता ने कहा कि सरकार किसानों से बात कर रही है। भारतीय किसान यूनियन और अन्य संगठन मौके पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन कुछ अन्य एलिमेंट ने भी प्रदर्शन में भाग ले लिया है। सरकार किसानों के खिलाफ कुछ भी नहीं कर रही है।

सरकार की बातचीत का प्रयास सराहनीय-SC

चीफ जस्टिस ने तब कहा कि आपने बातचीत की है लेकिन वह फेल हुआ है और फिर भी आप बातचीत के लिए तैयार हैं जो सराहनीय है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हम मामले में नोटिस जारी करते हैं और सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख तय करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसानों और उनके संगठनों की एक कमिटी का गठन किया जाएगा। सरकार के नामित व्यक्ति भी होंगे। Farmers Protest का ये मामला राष्ट्रीय महत्व का बन गया है और इसे बातचीत से हल किया जाना जरूरी है।

सरकार कर रही है प्लानिंग- तुषार मेहता

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। अदालत ने तुषार मेहता से कहा कि हम आपको बताना चाहते हैं कि Farmers Protest को लेकर हम कुछ प्लानिंग कर रहे हैं। हम एक कमिटी का गठन करने जा रहे हैं जो मामले में विवाद का निपटारा करेगा। इसमें भारतीय किसान यूनियन, भारत सरकार और अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि होंगे। हम किसान संगठनों से कहेंगे कि वह इस कमिटी के पार्ट बनें क्योंकि ये मुद्दा जल्दी ही राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बनने जा रहा है।

शीर्ष अदालत ने 5 पक्षों को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने याचिकाकर्ता की अर्जी पर केंद्र, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और यूपी को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख तय कर दी है साथ ही याचिाककर्ता से कहा है कि वह किसानों के संगठनों को पार्टी बनाए। याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने की गुहार लगाई है।

लॉ स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई

एक याचिकाकर्ता जो लॉ स्टूडेंट है उसकी ओर से कहा गया है कि Farmers Protest की वजह से सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया है और इस कारण इमरजेंसी सर्विस और मेडिकल सर्विस प्रभावित हो रहा है। दिल्ली में कोविड (Covid) केसों का इजाफा हो रहा है। दिल्ली में अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज आते हैं ताकि इलाज करा सकें वो सभी प्रभावित हो रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि लाखों लोग Farmers Protest में भाग ले रहे हैं जिनकी जिंदगी खतरे में है क्योंकि कोरोना वायरस की बीमारी फैली हुई है। इस कारण अंदेशा है कि कोरोना महामारी और ज्यादा फैल सकती है। इससे देश में खतरा हो सकता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले किसानों (Farmers Protest) को दिल्ली बॉर्डर से अन्य जगह पर शिफ्ट किया जाना चाहिए और बंद पड़े सड़कों को ओपन किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के बीच मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होना चाहिए। पुलिस प्रदर्शनकारियों के लिए जगह अलॉट किए थे लेकिन प्रदर्शनकारी वहां शिफ्ट नहीं हो रहे हैं।