पंजाब Congress में नेतृत्व पर सस्पेंस बरकरार: भूपेश बघेल ने सौंपी रिपोर्ट, बोले- ‘यह बच्चों का खेल नहीं है’

पंजाब Congress में लंबे समय से चल रहे नेतृत्व विवाद के बीच पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है। रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब प्रदेश Congress के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज हो चुकी है और कई वरिष्ठ नेता नए प्रदेश अध्यक्ष की वकालत कर रहे हैं। हालांकि, भूपेश बघेल के ताजा बयान ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल पार्टी नेतृत्व में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है।

राजा वारिंग को बनाए रखने की सिफारिश

सूत्रों के अनुसार, भूपेश बघेल की रिपोर्ट में पंजाब Congress अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को उनके पद पर बनाए रखने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के 29 में से 25 जिला कांग्रेस अध्यक्ष और सात में से चार Congress सांसद राजा वारिंग के समर्थन में हैं। ऐसे में संगठनात्मक मजबूती को देखते हुए फिलहाल नेतृत्व बदलना उचित नहीं माना गया है।

‘यह बच्चों का खेल नहीं है’

दिल्ली में केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने स्पष्ट संकेत दिया कि नेतृत्व परिवर्तन कोई आसान फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा, “यह बच्चों का खेल नहीं है।” इससे पहले चंडीगढ़ में भी उन्होंने यही बात दोहराई थी। उनके इस बयान को कांग्रेस हाईकमान के मौजूदा नेतृत्व पर भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

चरणजीत सिंह चन्नी ने उठाए सवाल

हालांकि, पार्टी के भीतर सभी नेता इस फैसले से सहमत नहीं हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी लगातार प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में नए नेतृत्व की जरूरत है। चन्नी के समर्थन में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी खुलकर सामने आए हैं और पार्टी हाईकमान से बदलाव की मांग कर चुके हैं।

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यही वजह है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर दो स्पष्ट गुट बनते दिखाई दे रहे हैं। एक गुट राजा वारिंग के समर्थन में है, जबकि दूसरा नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है।

6 दिन तक नेताओं से की चर्चा

नई प्रदेश टीम की घोषणा के बाद भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ में लगभग छह दिन बिताए। इस दौरान उन्होंने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की। अपने दौरे के अंतिम दिन उन्होंने चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाले नाराज नेताओं से भी चर्चा की और उनकी राय जानी।

इन्हीं बैठकों के आधार पर तैयार रिपोर्ट अब कांग्रेस नेतृत्व को सौंप दी गई है, जिस पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को लेना है।

दिल्ली में बैठकों का दौर तेज

पंजाब कांग्रेस में जारी खींचतान को देखते हुए दिल्ली में भी लगातार बैठकों का दौर जारी है। Congress नेता राहुल गांधी ने हाल ही में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की, जिसमें केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। इसके अलावा वेणुगोपाल ने पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा से भी अलग से चर्चा की।

इन बैठकों को पंजाब कांग्रेस के भविष्य और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

चुनाव से पहले Congress के सामने बड़ी चुनौती

पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में Congress अपने संगठन को मजबूत करने और गुटबाजी खत्म करने की कोशिश कर रही है। लेकिन नेतृत्व को लेकर जारी विवाद पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है।

इस बीच आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल ने भी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भारी बहुमत हासिल कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था और पहली बार पंजाब में अपनी सरकार बनाई थी।

अब कांग्रेस की कोशिश है कि वह संगठनात्मक मतभेदों को जल्द सुलझाकर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरे। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के हाथ में है और आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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