भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के लिए जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में से एक है Onam, जो केरल का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध त्योहार है। यह केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि कृषि, लोक-संस्कृति, कला और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। ओणम दस दिनों तक मनाया जाता है और हर दिन का अपना अलग महत्व है।
Pulikkali: केरल का जीवंत बाघ नृत्य
Onam के दस दिन
पहला दिन – अथम (Atham)
इस दिन से Onam का आरंभ होता है। लोग अपने घर के आंगन में पुक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाना शुरू करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा और प्रार्थना की जाती है।
दूसरा दिन – चिथिरा (Chithira)
इस दिन पुक्कलम में और फूल जोड़े जाते हैं। घरों की सफाई और सजावट पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
तीसरा दिन – चोधी (Chodhi)
परिवारजन नए कपड़े (ओणक्कोडी) खरीदते हैं और उत्सव की तैयारियों को गति मिलती है।
चौथा दिन – विसाकम (Visakam)
यह दिन व्यस्त बाज़ारों और तैयारी का होता है। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं और उत्सवों की शुरुआत यहीं से होती है।
पाँचवाँ दिन – अऩिझम (Anizham)
ओणम की मशहूर नौका दौड़ (Vallamkali) इसी दिन शुरू होती है। यह दृश्य हजारों दर्शकों को आकर्षित करता है।
छठा दिन – त्रिकेता (Thriketa)
रिश्तेदार और परिवारजन आपस में मिलते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
सातवाँ दिन – मूलम (Moolam)
मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में ओणम से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
आठवाँ दिन – पूरडम (Pooradam)
लोग घर के आंगन में मिट्टी की मूर्तियाँ रखते हैं, जिन्हें ओणथप्पन कहा जाता है।
नौवाँ दिन – उत्राडम (Uthradom)
इसे पहला ओणम भी कहते हैं। परंपरा के अनुसार, इसी दिन महान राजा महाबली धरती पर पहुँचते हैं।
दसवाँ दिन – तिरुओणम (Thiruvonam)
यह ओणम का मुख्य और सबसे भव्य दिन है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, मंदिर जाते हैं और विशेष पूजा करते हैं। घर-घर में ओणम साद्या (केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला 20–25 व्यंजनों का भोज) आयोजित होता है। साथ ही Pulikkali (टाइगर डांस) और कथकली जैसे लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
सांस्कृतिक महत्व
ओणम केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह त्योहार फसल कटाई, समृद्धि, लोक-कलाओं और सामुदायिक सौहार्द्र का उत्सव है। यह त्योहार राजा महाबली की याद में मनाया जाता है, जिनके शासन को स्वर्ण युग माना जाता है।
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