Animal Birth Control: दिल्ली का आवारा कुत्तों का नसबंदी कार्यक्रम ठीक से काम क्यों नहीं कर रहा है?

एबीसी कार्यक्रम कागज़ों पर तो सक्रिय दिखता है, लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि संसाधन, प्रबंधन और जागरूकता की कमी इसकी सफलता में सबसे बड़ी बाधा है। जब तक इन खामियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक दिल्ली की सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या कम होना मुश्किल है।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार और नगर निगम द्वारा वर्षों से एबीसी (Animal Birth Control) यानी पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नज़र नहीं आ रहे। सवाल यह है कि आखिर यह योजना प्रभावी क्यों नहीं हो पा रही है?

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क्या है Animal Birth Control कार्यक्रम?

एबीसी यानी Animal Birth Control का मकसद आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना है। इस योजना के तहत कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी (Sterilization) और टीकाकरण किया जाता है, ताकि उनकी प्रजनन क्षमता खत्म हो जाए और साथ ही रेबीज़ जैसी बीमारियों से भी सुरक्षा मिले।

दिल्ली में एबीसी की स्थिति

Why is Animal Birth Control not working properly?
  • दिल्ली नगर निगम (MCD) इस कार्यक्रम को लागू करता है।
  • पिछले कुछ सालों में हजारों कुत्तों की नसबंदी की गई, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह कुल जनसंख्या की तुलना में बेहद कम है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि कुल कुत्ता जनसंख्या का कम से कम 70% नसबंदी किए बिना इस योजना का असर दिखना मुश्किल है।

समस्या कहाँ है?

Why is Animal Birth Control not working properly?
  1. अपर्याप्त संसाधन: नसबंदी केंद्रों की संख्या सीमित है और पशु चिकित्सकों की कमी है।
  2. कुप्रबंधन: कई बार नसबंदी किए गए कुत्तों को दूर स्थानों पर छोड़ दिया जाता है, जिससे उनकी मूल जगहों पर नए कुत्ते आ जाते हैं।
  3. बजट की समस्या: नगर निगम को पर्याप्त फंड और नियमित मॉनिटरिंग की कमी रहती है।
  4. जागरूकता की कमी: स्थानीय लोग नसबंदी कार्यक्रम में सहयोग करने से कतराते हैं और कभी-कभी विरोध भी करते हैं।
  5. तेज़ प्रजनन दर: नसबंदी की दर धीमी है, जबकि कुत्तों की प्रजनन क्षमता बहुत अधिक है।

परिणामस्वरूप

  • दिल्ली की सड़कों पर कुत्तों की संख्या में बड़ी कमी देखने को नहीं मिली।
  • आवारा कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
  • अस्पतालों में एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन की मांग बढ़ी है।

विशेषज्ञों का सुझाव

Why is Animal Birth Control not working properly?
  • नसबंदी केंद्रों और टीमों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • हर वार्ड स्तर पर मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो।
  • लोगों को जागरूक कर सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • नसबंदी के साथ-साथ कचरा प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाए, क्योंकि भोजन की उपलब्धता कुत्तों की संख्या को प्रभावित करती है।

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