नादिया में श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती पर गृह Amit Shah का संबोधन

पश्चिम बंगाल के नादिया में श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भाग लिया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का अपने जीवन में एक अरब बार श्रीकृष्ण नाम जप का संकल्प लेना ही असाधारण है, लेकिन उस संकल्प को पूर्ण करना और भी बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने इस असंभव प्रतीत होने वाले संकल्प को पूर्ण कर दुनिया के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

Amit Shah ने कहा कि उनका जीवन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज सुधार और सांस्कृतिक जागरण से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने उन्हें एक सच्चे गुरु और युगद्रष्टा के रूप में याद किया।

सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ संघर्ष

गृह मंत्री ने कहा कि श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने समाज में व्याप्त जातिगत बंधनों को तोड़ने का साहसिक कार्य किया। उन्होंने बताया कि महाभारत काल के बाद पहली बार उन्होंने ऐसे लोगों को यज्ञोपवित संस्कार प्रदान किया जो जन्म से ब्राह्मण नहीं थे। यह कदम उस समय की सामाजिक व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन था।

Amit Shah ने कहा कि यह निर्णय केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल थी। उन्होंने कई रूढ़ियों और संकीर्णताओं को चुनौती दी और यह संदेश दिया कि भक्ति और आध्यात्मिकता जन्म से नहीं, बल्कि आचरण और साधना से प्राप्त होती है।

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भक्ति आंदोलन को नई दिशा

Amit Shah ने कहा कि श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने भक्ति आंदोलन को संगठित रूप दिया और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम किया। उन्होंने गौड़ीय वैष्णव परंपरा को सुदृढ़ किया और श्रीकृष्ण भक्ति के संदेश को व्यापक समाज तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि उनका जीवन यह सिखाता है कि आध्यात्मिक साधना और सामाजिक दायित्व साथ-साथ चल सकते हैं। समाज में समरसता, समानता और आध्यात्मिक जागरण उनके कार्यों का मूल आधार था।

Amit Shah ने युवा पीढ़ी के लिए संदेश दिया

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं से आह्वान किया कि वे श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर के जीवन से प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि संकल्प, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव ही किसी व्यक्ति को महान बनाता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है।

अमित शाह ने कहा कि ऐसे महापुरुषों की जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का समय है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा ने दुनिया को मार्गदर्शन दिया है, और ऐसे संतों का योगदान इस परंपरा को और मजबूत बनाता है।

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समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं और संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर के योगदान को याद किया। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

अंत में अमित शाह ने कहा कि श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर का जीवन त्याग, तपस्या और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उनका आदर्श आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

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