महाराष्ट्र की राजनीति में कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता Priyanka Chaturvedi ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने की लालसा में वह लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर रही है।
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Priyanka Chaturvedi ने सत्ता के लिए संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया
भिवंडी में मीडिया से बातचीत के दौरान Priyanka Chaturvedi ने कहा कि भाजपा की राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना और उसे हर कीमत पर बनाए रखना रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने और राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
Priyanka Chaturvedi ने कहा, “आप सत्ता की इतनी भूखी और शौकीन हैं कि संविधान को कमजोर कर रहे हैं, एजेंसियों को नियंत्रित कर रहे हैं और लोकतंत्र के सिद्धांतों को दांव पर लगा रहे हैं।”
“डर का माहौल बनाया जा रहा है”
Priyanka Chaturvedi ने दावा किया कि देश में ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जिसमें विपक्षी नेताओं पर लगातार दबाव बनाया जाता है। उनके अनुसार राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
Priyanka Chaturvedi ने कहा कि भाजपा को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि विपक्षी दलों को तोड़ने और राजनीतिक दबाव की राजनीति के आरोप लगातार क्यों लग रहे हैं।
ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं से बढ़ा सियासी तापमान
Priyanka Chaturvedi का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और पार्टी बदलने पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही राजनीतिक खबरों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।
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बागी सांसदों पर संजय राउत का हमला
इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नई दिल्ली में आयोजित पार्टी की संसदीय बैठक में छह लोकसभा सांसदों की अनुपस्थिति के बाद राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
बैठक में केवल कुछ सांसदों की मौजूदगी रही, जबकि कई सांसद गैरहाजिर रहे। इसके बाद राउत ने अनुपस्थित सांसदों को “गद्दार”, “बेईमान” और “धोखेबाज” बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी और कार्यकर्ताओं के विश्वास को तोड़ा है।
गैरहाजिर सांसदों को नोटिस
पार्टी सांसद अनिल देसाई ने संकेत दिया कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पार्टी व्हिप जारी किया गया था, इसके बावजूद गैरहाजिर रहने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
पार्टी नेतृत्व अब इन सांसदों के जवाब का इंतजार कर रहा है और आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है।
2022 की बगावत की यादें फिर ताजा
महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बड़े राजनीतिक विद्रोह ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस समय बड़ी संख्या में विधायक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो गए थे।
अब सांसदों के संभावित दलबदल की चर्चाओं ने एक बार फिर राजनीतिक संकट की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में जारी यह उठापटक आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। विपक्षी दल इसे भाजपा की रणनीति बता रहे हैं, जबकि भाजपा इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गैरहाजिर सांसदों का अगला कदम क्या होगा और क्या शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ेगा।
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