Jairam Ramesh ने जनगणना नियमों 1990 में बदलाव को लेकर BJP पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने शनिवार को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना के लिए गणना करने वालों (एन्यूमरेटर्स) के दायरे को बढ़ाने से, कथित तौर पर RSS और BJP के हजारों कार्यकर्ताओं को रोजगार मिल जाएगा।
Jairam Ramesh ने कहा, “यह साफ है कि यह RSS/BJP के हजारों कार्यकर्ताओं के लिए एक ‘रोजगार गारंटी योजना’ है।” X पर एक पोस्ट में, कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ये संशोधन हाल ही में बेलगाम में 10 जुलाई से 12 जुलाई तक हुई RSS की बैठक के बाद किए गए हैं।
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RSS इकोसिस्टम पर Jairam Ramesh का निशाना
Jairam Ramesh ने दावा किया कि ‘जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति’ ने देश में जनसांख्यिकीय बदलावों के संबंध में भारतीय और विदेशी संगठनों से सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं।
उन्होंने कहा कि इस समिति में ‘उच्च-स्तरीय’ बस एक ही बात है – इसके सदस्यों का RSS इकोसिस्टम से जुड़ा होना। Jairam Ramesh ने कहा, “मोदी सरकार ने जनगणना 2027 के लिए गणना करने वालों (एन्यूमरेटर) की पात्रता सूची का विस्तार किया है।
इसके पीछे कोई बड़ी गड़बड़ी है। 10-12 जुलाई 2026 के दौरान, RSS ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका एकमात्र एजेंडा जनगणना 2027 था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को गठित ‘जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति’ ने देश में जनसांख्यिकीय बदलावों पर भारतीय और विदेशी संगठनों सहित आम जनता से सुझाव मांगे हैं।
इस समिति में ‘उच्च-स्तरीय’ बस एक ही बात है – इसके सदस्यों का RSS इकोसिस्टम से जुड़ा होना। इसलिए हमें पता है कि ये सुझाव कहां से आएंगे।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इस बदलाव से जनगणना 2027 दूषित हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि SIR की तरह ही, जनगणना प्रक्रिया में भी हेरफेर की जाएगी।
रमेश ने आगे कहा, “इससे पहले से ही प्रभावित जनगणना और अधिक दूषित हो जाएगी। एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है। SIR की तरह, जनगणना में भी खतरनाक तरीके से हेरफेर की जाएगी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी की खतरनाक साजिशों की कोई सीमा नहीं है।”
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जनगणना नियम 1990 में नया बदलाव
कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी तब आई है, जब केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को ‘जनगणना नियम, 1990’ में संशोधन किया। इसके तहत, जनगणना का काम करने के लिए पात्र लोगों की श्रेणियों का विस्तार किया गया है, जिसमें अब सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी अधिकारी और क्लर्क आदि भी शामिल हो गए हैं।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार, लोकल अथॉरिटी, मदद पाने वाली या बिना मदद पाने वाली प्राइवेट बॉडी, सोसाइटी या ट्रस्ट के एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन के टीचर एन्यूमरेटर के तौर पर काम कर सकते हैं।
बदले हुए नियमों में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, लोकल अथॉरिटी और जगहों के क्लर्क और दूसरे अधिकारी भी शामिल हैं। इन जगहों में पब्लिक सेक्टर की कंपनियां, कानूनी बॉडी, बैंक, कंपनियां, इंस्टिट्यूशन, सोसाइटी और ट्रस्ट शामिल हैं।
मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स (MHA) ने सेंसस एक्ट, 1948 के सेक्शन 18(1) से मिली शक्तियों के तहत नए सेंसस (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 को नोटिफाई किया। इसके अलावा, ये नियम राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के एडमिनिस्ट्रेशन को एन्यूमरेटर के तौर पर अपॉइंटमेंट के लिए किसी दूसरे सही व्यक्ति पर विचार करने की इजाज़त देते हैं।
मुख्य सेंसस रूल्स असल में 31 दिसंबर, 1990 को भारत के गजट में पब्लिश हुए थे, और बाद में 1994, 2009, 2018 और 2022 में जारी नोटिफिकेशन के ज़रिए उनमें बदलाव किए गए।
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