Leh Violence: सुप्रीम कोर्ट ने लेह में हुई हिंसा के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किए जाने के मामले में केंद्र सरकार और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की है। याचिका में वांगचुक की गिरफ्तारी को मनमाना और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
Ladakh झड़पों में 4 मौतों के दो दिन बाद कार्यकर्ता सोनम वांगचुक गिरफ्तार
याचिकाकर्ता का कहना है कि वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे थे, फिर भी उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र और लद्दाख प्रशासन से विस्तृत जवाब तलब किया है।
Leh Violence के बारे में
लद्दाख के Leh में हाल ही में स्वायत्तता, जनसंख्या सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रहे जन आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क उठी। यह आंदोलन मुख्य रूप से लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने, जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा, और क्षेत्र में बिना स्थानीय सहमति के भूमि व संसाधनों पर बाहरी हस्तक्षेप के विरोध से जुड़ा था।
आंदोलन के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया, जिसके खिलाफ देशभर में विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन से इस पर जवाब मांगा है।
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