TMC में बगावत पर Mahua Moitra का पलटवार, बागी विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती

पश्चिम Bengal की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरी बड़ी बगावत ने राज्य की सियासत को हिला दिया है। पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे जनता के जनादेश और ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन विधायकों ने TMC के टिकट और ममता बनर्जी के नाम पर चुनाव जीता, वे अब BJP के साथ खड़े होकर मतदाताओं की भावनाओं के खिलाफ काम कर रहे हैं।

58 विधायकों के दावे से बढ़ा राजनीतिक संकट

बुधवार को TMC के 80 नव-निर्वाचित विधायकों में से 58 विधायक विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बोस के कक्ष तक पहुंचे और TMC विधायक दल पर अपना दावा पेश किया। हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व वाले इस गुट का कहना है कि उन्होंने दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई समर्थन हासिल कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने रीताब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता घोषित करने की मांग भी की।

“ममता बनर्जी के नाम पर मिले वोट”

महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि चुनाव में TMC को मिला जनादेश पूरी तरह ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के चुनाव चिन्ह के आधार पर था। उन्होंने कहा कि पार्टी को लगभग 41 प्रतिशत वोट मिले, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व में जनता के विश्वास को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, बागी विधायक यह दावा नहीं कर सकते कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता के आधार पर चुनाव जीते थे।

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इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती

बागी विधायकों को चुनौती देते हुए मोइत्रा ने कहा कि यदि उन्हें अपने जनाधार पर भरोसा है तो उन्हें अपनी सीटों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे किसी “बीजेमूल” प्रतीक के तहत चुनाव मैदान में उतरें और जनता से नया जनादेश हासिल करें। उन्होंने कहा कि जो नेता BJP विरोधी वोटों के आधार पर जीते थे, वे अब BJP समर्थक राजनीति नहीं कर सकते।

चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों का व्यवहार और मतदाता सूचियों से नाम हटाने जैसी घटनाएं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती हैं। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम करने के बजाय BJP के हितों को फायदा पहुंचाने वाला रवैया अपनाया।

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TMC सांसद ने कहा- “पार्टी का शुद्धिकरण जरूरी”

TMC सांसद ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को रोकने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी है और जो लोग पार्टी की विचारधारा में विश्वास नहीं रखते, उनके लिए दरवाजे खुले हैं। मोइत्रा ने मौजूदा संकट को पार्टी के “शुद्धिकरण” का अवसर बताते हुए कहा कि संगठन में केवल प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं और नेताओं को ही बने रहना चाहिए।

आगे क्या होगा?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। एक तरफ बागी गुट अपने पास पर्याप्त संख्या बल होने का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर TMC नेतृत्व इसे जनता के जनादेश और पार्टी की विचारधारा के साथ धोखा बता रहा है। अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर टिकी है, जो इस राजनीतिक संघर्ष की अगली दिशा तय करेंगी।

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