NV Subhash बोले- सिद्धांत नहीं, सत्ता है ममता-CPI(M) का लक्ष्य

बीजेपी प्रवक्ता NV Subhash ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सीपीआई(एम) पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद सत्ता बनाए रखने की हताशा में ही वे दोनों साथ आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बनर्जी ने सीपीआई(एम) से संपर्क तब किया जब पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी का चुनावी प्रदर्शन खराब रहा। NV Subhash ने बताया, “ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में बुरी तरह हार गई हैं।

और साथ ही, वह अपनी कट्टर विरोधी पार्टी सीपीआई के साथ बातचीत शुरू कर रही हैं। उन्होंने सीपीआईएम के महासचिव मिस्टर बेबी के साथ बातचीत शुरू की है।”

NV Subhash ने ममता-CPI(M) पर साधा निशाना

NV Subhash ने कहा कि यह कोशिश दिखाती है कि दोनों पक्ष सिर्फ़ संवैधानिक प्रावधानों और चुनाव आयोग (EC) का विरोध करने के लिए सत्ता बनाए रखने को लेकर कितने बेताब हैं। उन्होंने कहा, “इससे पता चलता है कि कम्युनिस्ट पार्टी और ममता बनर्जी, दोनों ही सत्ता के लिए कितने बेताब हैं।

ये ताकतें अब दोस्त बन रही हैं और यह पक्का कर रही हैं कि वे सिर्फ़ संवैधानिक प्रावधानों, संवैधानिक अधिकारियों और भारत के चुनाव आयोग का विरोध करने के लिए एक मंच पर आएं।”

NV Subhash ने आरोप लगाया कि भारत के लोगों के फ़ायदे के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए वैचारिक मतभेदों को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “वे इतने अच्छे दोस्त बन गए हैं कि अपनी राजनीतिक पार्टियों की वैचारिक विचारधारा को पूरी तरह भूल गए हैं। वे सिर्फ़ सत्ता चाहते हैं।

हमें हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले दिनों में CPI और ममता बनर्जी सिर्फ़ अपने अस्तित्व को बचाने के लिए सत्ता में हिस्सेदारी करने के लिए हाथ मिला लें, न कि लोगों के फ़ायदे के लिए।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के लोगों के बीच बनर्जी की विश्वसनीयता खत्म हो गई है और उनकी पार्टी के कई नेता उन्हें छोड़कर चले गए हैं। उन्होंने कहा, “हाल ही में हुए चुनावों में पश्चिम बंगाल की जनता ने उन्हें सचमुच सबक सिखाया है, और ममता बनर्जी ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है।

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Mamata Banerjee के कार्यकाल पर BJP के गंभीर आरोप

सिर्फ़ जनता ने ही नहीं, बल्कि उनके साथ रहे नेताओं ने भी उनके अलग रवैये और काम करने के अलोकतांत्रिक तरीकों की वजह से पार्टी छोड़ दी है।” सुभाष ने बनर्जी के कार्यकाल के दौरान राज्य में बीजेपी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में, 15 साल के अजीबोगरीब शासन के दौरान, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की हत्या की गई, उन्हें जेल में डाला गया और अपनी सत्ता बचाने के लिए कई तरह से परेशान किया गया।

सत्ता में हिस्सेदारी के फ़ायदे के लिए पार्टियों का इस तरह का बिना किसी विचारधारा वाला गठबंधन, पश्चिम बंगाल या देश के बाकी हिस्सों में लोगों को शायद मंज़ूर न हो।”

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