Overthinking और Anxiety में क्या फर्क है? आसान भाषा में समझें

ऐसे में अक्सर Overthinking और चिंता (Anxiety) को एक ही समझ लिया जाता है। हालांकि, दोनों एक-दूसरे से जुड़े होने के बावजूद बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं।

आज की तेज जिंदगी में बहुत से लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर बार-बार सोचते रहते हैं। किसी बातचीत में कही गई बात, आने वाले समय की चिंता या अतीत में हुई किसी घटना को बार-बार याद करना दिमाग को थका सकता है।

Overthinking क्या है?

Overthinking का मतलब है किसी बात के बारे में जरूरत से ज्यादा और बार-बार सोचना। इसमें व्यक्ति किसी घटना, फैसले या समस्या को अलग-अलग नजरिए से लगातार सोचता रहता है, लेकिन अक्सर किसी समाधान तक नहीं पहुंच पाता।

उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी दोस्त को फोन किया और उसने जवाब नहीं दिया, तो सामान्य तौर पर आप कुछ समय बाद इसे भूल सकते हैं। लेकिन Overthinking की स्थिति में मन में बार-बार सवाल आ सकते हैं—“उसने फोन क्यों नहीं उठाया?”, “क्या वह मुझसे नाराज है?”, “क्या मैंने कुछ गलत कह दिया?”

इस तरह की सोच अतीत की घटनाओं या भविष्य में होने वाली संभावित परिस्थितियों पर भी केंद्रित हो सकती है।

चिंता क्या है?

चिंता एक सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया है। किसी परीक्षा, नौकरी के इंटरव्यू, आर्थिक समस्या या महत्वपूर्ण फैसले से पहले घबराहट या चिंता होना स्वाभाविक है।

चिंता में व्यक्ति को किसी संभावित समस्या या खतरे को लेकर बेचैनी महसूस हो सकती है। इसके साथ दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी, नींद में परेशानी, ध्यान लगाने में कठिनाई या तनाव जैसे शारीरिक और मानसिक अनुभव भी हो सकते हैं।

कभी-कभी चिंता थोड़े समय के लिए होती है और परिस्थिति बदलने के साथ कम हो जाती है। लेकिन अगर चिंता लगातार बनी रहे और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उपयोगी हो सकता है।

Overthinking और चिंता में मुख्य अंतर

दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके केंद्र और अनुभव में देखा जा सकता है। Overthinking में व्यक्ति किसी विचार या घटना को बार-बार अपने दिमाग में दोहराता रहता है। वहीं चिंता में भविष्य में कुछ गलत होने की आशंका और उससे जुड़ी बेचैनी अधिक प्रमुख हो सकती है।

उदाहरण के लिए, किसी पुरानी गलती के बारे में लगातार सोचना Overthinking हो सकता है। दूसरी ओर, “अगर कल मीटिंग में कुछ गलत हो गया तो?” जैसी लगातार आशंका चिंता का हिस्सा हो सकती है।

हालांकि, दोनों एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं। लगातार Overthinking से तनाव और चिंता बढ़ सकती है, जबकि चिंता के कारण भी व्यक्ति किसी समस्या के बारे में बार-बार सोच सकता है।

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Overthinking कम करने के लिए क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आप किसी विषय पर जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं, तो कुछ सरल कदम मदद कर सकते हैं।

सबसे पहले, अपने विचारों को पहचानने की कोशिश करें। यह समझें कि आप समस्या का समाधान खोज रहे हैं या सिर्फ उसी विचार को दोहरा रहे हैं।

कुछ समय के लिए ध्यान किसी दूसरे काम पर लगाना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, पर्याप्त नींद लेना और किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना भी मददगार हो सकता है। अपनी चिंताओं को लिख लेना भी विचारों को व्यवस्थित करने का एक तरीका हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि हर चिंता या ज्यादा सोचने को तुरंत किसी मानसिक बीमारी का संकेत न मानें। कभी-कभी तनावपूर्ण परिस्थितियों में ऐसा होना सामान्य है। लेकिन अगर बेचैनी, लगातार चिंता या नकारात्मक विचार लंबे समय तक बने रहें और काम, पढ़ाई, रिश्तों या नींद पर असर डालें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

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