Commonwealth Speakers’ Conference का उद्घाटन: PM Modi का लोकतंत्र पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसीडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का PM Modi ने उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में हुआ, जिसे अब “संविधान सदन” कहा जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यही वह स्थान है जहां आज़ादी से पहले संविधान सभा की बैठकें हुईं और आज़ादी के बाद दशकों तक संसद की कार्यवाही चली।

लोकतंत्र का अर्थ: लास्ट माइल डिलीवरी

PM Modi at Commonwealth Speakers' Conference

सम्मेलन का विषय “Effective Delivery of Parliamentary Democracy” बताते हुए PM Modi ने कहा कि भारत ने विविधता को लोकतंत्र की ताकत बनाया है। उनके अनुसार, मजबूत लोकतांत्रिक संस्थान लोकतंत्र को स्थिरता, गति और व्यापकता देते हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत में लोकतंत्र का असली मतलब है—“लास्ट माइल डिलीवरी”, यानी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना।

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गरीबी उन्मूलन और लोक कल्याण

PM Modi ने कहा कि लोक कल्याण की इसी नीति के कारण बीते कुछ वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। सरकार बिना भेदभाव हर नागरिक तक सुविधाएं पहुंचाने पर काम कर रही है और यही लोकतंत्र की वास्तविक सफलता है।

ग्लोबल साउथ से लेकर यूपीआई तक: PM Modi ने रखी भारत की ताकत

PM Modi at Commonwealth Speakers' Conference

PM Modi ने कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूती से उठाता रहा है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा।

आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान सिस्टम बन चुका है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है और साथ ही दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक भी है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की बढ़त

PM Modi at Commonwealth Speakers' Conference

उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम, तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट, चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है। ये उपलब्धियां प्रभावी लोकतांत्रिक शासन और तेज़ निर्णय क्षमता का परिणाम हैं।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र का असली उद्देश्य केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। उन्होंने कॉमनवेल्थ देशों से संसदीय प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की अपील की।

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