Waqf Bill के पास होने के बाद देश के कई प्रमुख शहरों में विरोध-प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद और भोपाल जैसे शहरों में मुस्लिम संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों ने सड़कों पर उतर कर वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधनों का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों पर समुदाय के अधिकार को कमजोर करता है और सरकार को अधिक नियंत्रण देता है।
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Waqf Bill के खिलाफ प्रदर्शन
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे लेकिन उनमें व्यापक भागीदारी देखने को मिली, जिसमें धर्मगुरु, वकील, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। उनका कहना है कि यह कानून समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वायत्तता के खिलाफ है और इसके ज़रिए वक्फ संपत्तियों के निजीकरण या राजनीतिकरण की कोशिश की जा रही है।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि संशोधन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है, ताकि वक्फ बोर्डों में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को रोका जा सके। लेकिन विरोधियों का मानना है कि यह “सुधार” के नाम पर हस्तक्षेप और नियंत्रण का जरिया है।
इस बीच कई विपक्षी दलों ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए संसद में इस विधेयक की समीक्षा की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और समुदाय के बीच संवाद की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई गई, तो यह मुद्दा आगे और गंभीर राजनीतिक रूप ले सकता है।
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