लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने मणिपुर में हुई ताज़ा हिंसक घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मणिपुर में नफरत और हिंसा की आग अब भी नहीं थमी है और हालिया घटनाओं में कम से कम 20 घर जलकर राख हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां लोगों को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर रही हैं, जिसका परिणाम आज मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य भुगत रहे हैं।
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“मणिपुर वर्षों से जल रहा है”
Rahul Gandhi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मणिपुर वर्षों से हिंसा और अस्थिरता की आग में जल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारों के बदलाव और राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। उनके अनुसार, हिंसा और संघर्ष लगातार गहराते जा रहे हैं और इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
“हजारों लोगों की जान गई, परिवार बिखर गए”
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कहा कि हजारों लोगों की जान जा चुकी है और अनगिनत परिवार विस्थापन, भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। Rahul Gandhi ने कहा कि मणिपुर के लोगों की पीड़ा इतनी गंभीर है कि उसकी कल्पना करना भी कठिन है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं और अब तक कोई प्रभावी समाधान क्यों नहीं निकाला गया है।
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मोदी सरकार की नीतियों पर Rahul Gandhi ने साधा निशाना
Rahul Gandhi ने अपने बयान में मोदी सरकार की राजनीति पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की राजनीति लोगों को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के आधार पर बांटने पर आधारित है। Rahul Gandhi के मुताबिक, यही विभाजनकारी राजनीति देश के कई हिस्सों में सामाजिक तनाव और संघर्ष को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि मणिपुर ही नहीं, बल्कि पूरा देश प्रधानमंत्री से संवेदना के दो शब्द सुनने की उम्मीद भी छोड़ चुका है।
“भारत को एक करना ही समाधान”
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मणिपुर के लोगों को केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि शांति, न्याय और पुनर्वास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को एकजुट करने की राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है और मणिपुर संकट का समाधान भी इसी रास्ते से संभव है।
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महिला वेंडर्स का प्रदर्शन और गिरफ्तारी का विरोध
गौरतलब है कि मणिपुर में हाल के दिनों में तनाव और बढ़ गया है। इससे पहले 23 जून को हजारों महिला विक्रेताओं ने केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गांव के स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और मणिपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गिरफ्तार किए गए लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की थी।
अरम्बाई टेंगोल के स्वयंसेवकों की रिहाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से अरम्बाई टेंगोल संगठन के तीन स्वयंसेवकों की रिहाई की मांग को लेकर भी आंदोलन किया। यह विरोध उस समय और तेज हो गया जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े छह मामलों में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक की।
NIA की कार्रवाई और आगे की जांच
एनआईए के अनुसार, ये गिरफ्तारियां मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ के सहयोग से इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, बिष्णुपुर, चुराचांदपुर, उखरुल, चंदेल और फेरज़ावल समेत कई जिलों में चलाए गए समन्वित अभियान के दौरान की गईं। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य में जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है।
राजनीतिक बहस के केंद्र में फिर आया मणिपुर
मणिपुर में जारी हिंसा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर राज्य में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए केंद्र और राज्य प्रशासन की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। वहीं, राहुल गांधी के इस बयान ने मणिपुर के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
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