उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे पर सियासत गरम, संजय राउत बोले- पर्दे के पीछे कुछ और है

राज्यसभा की कार्यवाही के संचालन में विपक्ष के प्रति उनकी कड़ी टिप्पणियाँ और न्यायपालिका पर सार्वजनिक आलोचना ने उन्हें एक टकरावपूर्ण उपराष्ट्रपति के रूप में स्थापित किया।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक हलचलों को हवा दे दी है। मीडिया से बातचीत में राउत ने स्पष्ट रूप से कहा कि “यह घटना केवल स्वास्थ्य कारणों से जुड़ी नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे बड़ी राजनीति चल रही है, जिसका खुलासा बहुत जल्द होने वाला है।”

Jagdeep Dhankhar का इस्तीफा: क्या न्यायपालिका पर सवाल उठाना पड़ा भारी?

उन्होंने यह दावा भी किया कि उन्होंने हाल ही में उपराष्ट्रपति को देखा था और उनकी तबीयत पूरी तरह से ठीक प्रतीत हो रही थी। ऐसे में स्वास्थ्य का हवाला देकर पद त्यागना संदेहास्पद है। राउत ने यह भी इशारा किया कि सितंबर महीने में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है, जो इस इस्तीफे से जुड़ा हो सकता है।

इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां पहले ही Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे को लेकर सवाल उठ रहे थे। विपक्षी दलों ने पहले भी आरोप लगाए थे कि धनखड़ की स्पष्टवादिता और न्यायपालिका सहित विभिन्न संस्थानों पर की गई टिप्पणियाँ सत्तारूढ़ दल को असहज कर रही थीं। ऐसे में यह इस्तीफा केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला है या किसी बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा — यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने दिया इस्तीफा

उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने पत्र में कहा कि उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू होगा। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें भारत के “परिवर्तनकारी युग” की सेवा का अवसर मिला, जो उनके लिए एक “सच्चा सम्मान” रहा।

धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब वे अपने स्पष्ट और मुखर रवैये के लिए लगातार चर्चा में रहे। राज्यसभा की कार्यवाही के संचालन में विपक्ष के प्रति उनकी कड़ी टिप्पणियाँ और न्यायपालिका पर सार्वजनिक आलोचना ने उन्हें एक टकरावपूर्ण उपराष्ट्रपति के रूप में स्थापित किया। उनके कार्यकाल के दौरान विपक्ष ने उनके खिलाफ महाभियोग लाने का प्रयास भी किया था, जो भले ही विफल रहा, लेकिन यह अपने आप में एक ऐतिहासिक उदाहरण है।

Jagdeep Dhankhar ने उस प्रयास को खारिज करते हुए इसकी तुलना “जंग लगे सब्जी काटने वाले चाकू से बाईपास सर्जरी” करने जैसी असंगत कोशिश से की थी। 2022 में उन्होंने मार्गरेट अल्वा को 74.37% मतों से हराकर भारी जीत दर्ज की थी — यह जीत 1992 के बाद सबसे बड़े अंतर वाली उपराष्ट्रपति चुनावी जीत मानी जाती है।

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