Supreme Court ने गुरुवार (6 नवंबर) को समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान के बेटे Abdullah Azam Khan की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े दो दस्तावेज जालसाजी मामलों में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस पूर्व आदेश में हस्तक्षेप न करने का फैसला करने से पहले संक्षिप्त दलीलें सुनीं, जिसमें इस मामले में अब्दुल्ला की राहत की याचिका खारिज कर दी गई थी।
Supreme Court ने वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की
Abdullah Azam Khan पर जालसाजी और गलत बयानी के आरोप
ये मामले उन आरोपों से संबंधित हैं जिनमें Abdullah Azam Khan ने पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय जाली दस्तावेज और गलत जानकारी जमा की थी। आरोपों में दावा किया गया है कि वरिष्ठ सपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के बेटे ने आधिकारिक यात्रा दस्तावेज हासिल करने के लिए अपनी जन्मतिथि और पहचान प्रमाण से संबंधित रिकॉर्ड में हेराफेरी की।
प्राधिकारियों ने एक सत्यापन प्रक्रिया के बाद अब्दुल्ला के खिलाफ कार्यवाही शुरू की, जिसमें कथित तौर पर उनके द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं। ये मामले हाल के वर्षों में खान परिवार के सामने आई कानूनी चुनौतियों के व्यापक समूह का हिस्सा हैं।
उच्च न्यायालय का आदेश बरकरार
इससे पहले, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की अब्दुल्ला की याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि मुकदमा जारी रखने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे आरोपों की कार्यवाही को समय से पहले समाप्त करने के बजाय पूरी न्यायिक जाँच आवश्यक है। अब जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, मौजूदा आरोपों के अनुसार निचली अदालत में मुकदमा आगे बढ़ेगा।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक निहितार्थ
रामपुर के स्वार निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक रहे अब्दुल्ला आज़म खान समाजवादी पार्टी की युवा पीढ़ी का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग से संबंधित आरोप भी शामिल हैं।
सर्वोच्च न्यायालय का यह नवीनतम निर्णय खान परिवार के लिए एक और झटका है, जिसने लगातार अपने खिलाफ दर्ज मामलों के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद न तो अब्दुल्ला और न ही उनकी कानूनी टीम ने कोई नया बयान जारी किया है।
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