Shahzad Poonawalla का हमला: “राहुल गांधी हार की आशंका में बहाने बना रहे हैं”

Shahzad Poonawalla ने दावा किया कि चुनाव आयोग कांग्रेस द्वारा उठाए गए हर सवाल का तथ्यों के साथ कई बार जवाब दे चुका है, लेकिन राहुल गांधी और उनकी पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास नहीं है।

भाजपा नेता Shahzad Poonawalla ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना पर की गई टिप्पणियों के बाद यह स्पष्ट है कि वे बिहार चुनाव हारने जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हार की आशंका के चलते राहुल गांधी पहले से ही बहाने ढूंढ रहे हैं।

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पूनावाला ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने कांग्रेस के सभी सवालों के तथ्यात्मक उत्तर एक से अधिक बार दिए हैं, लेकिन राहुल गांधी को लगता है कि उनका “परिवार तंत्र” संवैधानिक तंत्र से ऊपर है। इसलिए जब वे चुनाव हारते हैं, तो चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिनके परिवार का इतिहास ही संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का रहा हो, उन्हें दूसरों पर ‘मैच फिक्सिंग’ जैसे आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

भाजपा नेता Shahzad Poonawalla ने कहा कि उनकी हालिया बयानबाज़ी से स्पष्ट है कि कांग्रेस बिहार चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर चुकी है और अब हार के लिए बहानों की भूमिका तैयार की जा रही है।

उन्होंने राहुल गांधी पर सेना का मनोबल गिराने वाले बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं, बल्कि राष्ट्र के सुरक्षा तंत्र पर भी आघात करती हैं।

“परिवार तंत्र को संवैधानिक तंत्र से ऊपर मानते हैं राहुल” – Shahzad Poonawalla

Shahzad Poonawalla ने दावा किया कि चुनाव आयोग कांग्रेस द्वारा उठाए गए हर सवाल का तथ्यों के साथ कई बार जवाब दे चुका है, लेकिन राहुल गांधी और उनकी पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की सोच यही दर्शाती है कि उनके लिए “परिवार तंत्र” संवैधानिक प्रक्रिया से ऊपर है, और जब चुनावी जनादेश उनके पक्ष में नहीं आता, तो वे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाने लगते हैं।

शहजाद पूनावाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस का इतिहास संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का रहा है — चाहे वह राष्ट्रपति की भूमिका हो, न्यायपालिका की स्वतंत्रता या केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिनके अपने दल का इतिहास लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ने का रहा है, उन्हें “मैच फिक्सिंग” जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए दूसरों पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

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