रबी अभियान 2026: Shivraj Singh Chauhan ने ‘Team Agriculture’ पर दिया जोर

Shivraj Singh Chauhan की अध्यक्षता में नेशनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस (रबी कैंपेन-2026) के दूसरे दिन अलग-अलग राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हुए एक सेशन में हिस्सा लिया।

इस कॉन्फ्रेंस में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव अतिश चंद्र और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एमएल जाट के साथ-साथ केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न कृषि संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

सभा को संबोधित करते हुए Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में, केंद्र और राज्यों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ‘टीम एग्रीकल्चर’ की भावना के साथ काम करना चाहिए, ताकि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की आजीविका बेहतर हो सके।

देश और किसान को प्राथमिकता

Shivraj Singh Chauhan ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकारें और राजनीतिक पार्टियां आती-जाती रहती हैं, पार्टियां बनती और बिगड़ती हैं, लेकिन देश और किसान हमेशा बने रहते हैं।

इस मंच पर राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है; इसका एकमात्र मकसद खेती को बेहतर बनाना और किसानों की तरक्की सुनिश्चित करना है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में, हर नीतिगत फैसले और अंतरराष्ट्रीय समझौते में किसानों के हितों को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी गई है।

इस मौके पर, केंद्रीय मंत्री ने मंच से ही 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (PM-RKVY) के तहत 1,082 करोड़ रुपये की मंज़ूरी के पत्र सौंपे।

Shivraj Singh Chauhan ने PM-RKVY योजना के तहत सीधे मंच से मंज़ूरी पत्र बांटे, जिसमें पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रुपये, हरियाणा को 198 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ रुपये, बिहार को 114 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 104 करोड़ रुपये, मिज़ोरम को 75 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़ रुपये, झारखंड को 58 करोड़ रुपये और पंजाब को 43 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ़ नीतियां बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधन भी उपलब्ध करा रही है ताकि ज़मीनी स्तर पर योजनाओं को तुरंत लागू किया जा सके।

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कृषि क्षेत्र में बढ़ी विकास दर

देश की कृषि उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 2015 से कृषि विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है। अनाज उत्पादन में औसत सालाना बढ़ोतरी दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है, जो पहले 4 मिलियन टन थी और अब 8.4 मिलियन टन सालाना हो गई है।

इसके अलावा, 2023-24 से 2025-26 की सिर्फ़ दो साल की अवधि में रबी अनाज उत्पादन में 20.5 मिलियन टन की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने इस ऐतिहासिक विकास का श्रेय राज्य कृषि विभागों, वैज्ञानिकों और देश का पेट भरने वाले किसानों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

सहकारी संघवाद को मज़बूत करने के मकसद से एक नया ऑपरेशनल फ़्रेमवर्क बताते हुए, केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि केंद्र में होने वाली साप्ताहिक समीक्षाओं की तर्ज़ पर, अब राज्यों के साथ नियमित मासिक वर्चुअल समीक्षा बैठकें की जाएंगी ताकि प्रगति पर लगातार नज़र रखी जा सके।

राज्य के कृषि मंत्रियों, कृषि सचिवों, राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, ICAR संस्थानों, KVKs, ATMA, FPOs, प्रगतिशील किसानों, प्रोसेसर्स, एक्सपोर्टर्स और भारत सरकार के नोडल अधिकारियों को मिलाकर राज्य स्तर पर एक मज़बूत कृषि टीम बनाई जाएगी। साथ ही, ज़िला स्तर पर कलेक्टर, DDA, ATMA, KVK, ICAR वैज्ञानिकों, बैंकरों और किसानों के साथ मासिक बैठकें होंगी।

कृषि अभियानों के शुरुआती चरण के लिए इंटरफ़ेस बैठकों का सालाना कैलेंडर तय करते हुए, उन्होंने निर्देश दिया कि खरीफ़ सीज़न के लिए ज़िला स्तरीय बैठकें हर साल 10 मई को और राज्य स्तरीय बैठकें 17 मई को आयोजित की जाएं।

इसी तरह, रबी अभियान के लिए ज़िला स्तरीय बैठकें 10 सितंबर को और राज्य स्तरीय बैठकें 17 सितंबर को करना ज़रूरी होगा। इसके अलावा, किसानों के हित में मिलकर काम करने के लिए कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों को एक साथ लाते हुए देश भर में एक साथ एक दिन की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

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‘खेत बचाओ अभियान’ पर बड़ा जोर

मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री श्री Shivraj Singh Chauhan ने इस साल 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी और बड़े पैमाने पर ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने का आह्वान किया। वैज्ञानिक समेत सभी मुख्य हितधारक इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

यह अभियान मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने और फायदेमंद कीड़ों को बचाने के लिए ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ के आधार पर खाद के संतुलित इस्तेमाल पर ध्यान देगा।

इसके अलावा, पूर्वी भारत के राज्यों – झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल – में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली ज़मीनों (जिन्हें ‘राइस-फेलो’ ज़मीन कहा जाता है) पर बड़े पैमाने पर दालों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस साल के रबी सीज़न की तैयारियों के तहत, उन्होंने मिट्टी में नमी और पानी की उपलब्धता के आधार पर किसानों को फसल चुनने और बेहतर बीज बोने की सलाह देने के महत्व पर ज़ोर दिया।

Shivraj Singh Chauhan ने फसलों को बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए मज़बूत उपाय करने, सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) देने और फसल बीमा योजना के तहत पारदर्शी तरीके से ‘क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट’ (CCE) करने के निर्देश दिए।

Shivraj Singh Chauhan ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य के मंत्रियों को सभी विभागीय योजनाओं के लागू होने की नियमित रूप से व्यक्तिगत समीक्षा करनी चाहिए। देश में बीज और खाद की उपलब्धता को पर्याप्त बताते हुए।

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Shivraj Singh Chauhan की नकली खाद पर सख्ती

Shivraj Singh Chauhan ने राज्यों को नकली खाद, नकली बीज और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई करने और ज़बरदस्ती ‘टैगिंग’ (एक उत्पाद के साथ दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करना) की प्रथा को पूरी तरह खत्म करने का निर्देश दिया।

खेती को टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए, उन्होंने ‘मिशन मोड’ में प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणालियों और फसल विविधीकरण को अपनाने का आह्वान किया।

Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि सरकार एक बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिले।

इस रणनीति में फसल कटाई के बाद का प्रबंधन, वैज्ञानिक तरीके से गोदामों में भंडारण और मज़बूत मार्केटिंग सिस्टम शामिल हैं। उन्होंने घोषणा की कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तुअर, उड़द और मसूर की 100% सरकारी खरीद की गारंटी दी जाएगी, और 48 घंटों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक सिस्टम लागू किया जाएगा।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप, अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के तहत नई बाज़ार नीतियों का लाभ उठाकर फलों, सब्ज़ियों और अनाजों सहित भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक निर्यात से जोड़ा जाएगा; इसका उद्देश्य किसानों की उपज के लिए बेहतरीन कीमतें हासिल करना और भारत को एक प्रमुख वैश्विक ‘फूड बास्केट’ (खाद्य भंडार) के रूप में स्थापित करना है।

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