Bengal elections में काउंटिंग नियमों पर विवाद, TMC सुप्रीम कोर्ट पहुंची; BJP ने साधा निशाना

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है, जब Trinamool Congress (TMC) ने काउंटिंग सुपरवाइज़र से जुड़े चुनाव आयोग के निर्देशों को चुनौती देते हुए Supreme Court of India का दरवाज़ा खटखटाया। इस कदम के बाद सियासी माहौल और गरमा गया है, जहां Bharatiya Janata Party (BJP) ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

BJP का आरोप—“खुद को एक्सपोज़ कर रही है TMC”

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता Ajay Alok ने Trinamool Congress पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी चुनाव परिणाम आने से पहले ही अपनी “बेचैनी” दिखा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद बार-बार अदालत का रुख करना क्या संकेत देता है। उनके अनुसार, Trinamool Congress हर कदम पर खुद को “एक्सपोज़” कर रही है और यह संभावित हार का संकेत है।

आलोक ने यह भी कहा कि अगर TMC काउंटिंग प्रक्रिया का बहिष्कार करती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक असामान्य और अभूतपूर्व कदम होगा, जो पार्टी की कमजोरी को दर्शाएगा।

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विवाद की जड़—काउंटिंग सुपरवाइज़र नियम

यह पूरा विवाद Election Commission of India (EC) के उस निर्देश को लेकर है, जिसमें वोटों की गिनती के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान किया गया है। Trinamool Congress का कहना है कि इस व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और इससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

वहीं BJP का आरोप है कि यह कदम चुनावी हार की आशंका को देखते हुए पहले से माहौल बनाने की कोशिश है।

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कपिल सिब्बल का स्पष्टीकरण

इस मामले में वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद Kapil Sibal ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के सर्कुलर को सही माना है और उसे लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने भी इस सर्कुलर को वैध ठहराया था।

सिब्बल के मुताबिक, Trinamool Congress ने सुप्रीम कोर्ट में सर्कुलर को चुनौती देने के बजाय इसके सही क्रियान्वयन की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में यह धारणा गलत है कि याचिका खारिज कर दी गई है, बल्कि अदालत ने चुनाव आयोग को अपने निर्देशों का अक्षरशः पालन करने को कहा है।

TMC का पक्ष—पारदर्शिता पर सवाल

TMC का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है और अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है, तो उसे पहले ही स्पष्ट किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के नए नियमों को लेकर स्पष्टता और भरोसे की जरूरत है।

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