Vaikuntha Ekadashi पर देवनाथ स्वामी मंदिर में सर्गवासल के उद्घाटन से उमड़े भक्त

भक्तों ने वैकुंठ एकादशी की पारम्परिक प्रार्थनाएँ, कीर्तन, आरती और मंत्र जाप में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें प्रसाद की लम्बी कतारें देखने को मिलीं।

कड्डलूर, तमिलनाडु: आज Vaikuntha Ekadashi के पावन अवसर पर कड्डलूर स्थित प्राचीन देवनाथ स्वामी मंदिर में भव्य रूप से सर्गवासल (परमपद वसल) का उद्घाटन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और श्रद्धा की लहर फैल गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जमा होने लगी और देश-विदेश से आए श्रद्धालु विधिवत पूजा-अर्चना तथा दर्शनार्थी रेखा में खड़े होकर अपने-अपने परिवारों के लिए आशीर्वाद की कामना करते दिखे।

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Vaikuntha Ekadashi हिन्दू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु वैकुंठ द्वार से सर्गवासल (जिसे परमपद वसल भी कहा जाता है) के माध्यम से अपने भक्तों को वैकुंठ लोक में प्रवेश का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी विचार के साथ सुबह मंदिर के मुख्य सर्गवासल द्वार को विधिवत खोलकर भक्तों को इसके दर्शन का अवसर दिया गया।

देवनाथ स्वामी मंदिर में Vaikuntha Ekadashi का भव्य आयोजन

भक्तों ने Vaikuntha Ekadashi की पारम्परिक प्रार्थनाएँ, कीर्तन, आरती और मंत्र जाप में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें प्रसाद की लम्बी कतारें देखने को मिलीं। कई भक्तों ने इस अवसर पर उपवास रखा और भगवान के दरबार में अपनी भक्ति सुमिरन प्रस्तुत किया।

विशेष रूप से सजाए गए मंदिर के प्रांगण में रंग-बिरंगी लाइटिंग, धार्मिक झांकियाँ और फूलों की सजावट ने आयोजन को और भी भव्य और प्रसन्नमय बना दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि वैकुंठ एकादशी पर सर्गवासल के दर्शन उन्हें आध्यात्मिक शांति और जीवन में समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और सहज व्यवस्था के लिए पुलिस तथा स्वयंसेवक दल के साथ मिलकर श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजा में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा।

इस शुभ आयोजन में सभी आयु के लोग — बच्चे, युवा, वृद्ध जन — सभी शामिल हुए और एकात्म भावना के साथ भगवान देवनाथ स्वामी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। सर्गवासल के उद्घाटन और वैकुंठ एकादशी के महत्व ने इस धार्मिक उत्सव को कड्डलूर के नगरवासियों तथा वहाँ आए भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया।

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