National Herald केस में Gandhi परिवार को बड़ी राहत-Congress का पलटवार
कांग्रेस का दावा है कि पिछले 10–12 साल से इस केस के नाम पर एजेंसियों का इस्तेमाल सिर्फ राहुल गांधी और सोनिया गांधी की छवि खराब करने और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया गया।

16 दिसंबर 2025 को कांग्रेस दफ्तर से Pawan Khera और पार्टी के वकील Mohd Khan ने प्रेस ब्रीफिंग की, जिसमें National Herald केस पर कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने ‘नैतिक और राजनीतिक जीत’ बताया है।
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कांग्रेस का दावा है कि पिछले 10–12 साल से इस केस (National Herald Case) के नाम पर एजेंसियों का इस्तेमाल सिर्फ राहुल गांधी और सोनिया गांधी की छवि खराब करने और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया गया।
National Herald केस में राहुल–सोनिया को बड़ी राहत
“Pawan Khera ने कहा कि कोर्ट ने ED की कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं और ये साफ हो गया है कि National Herald केस कानूनी रूप से बहुत कमजोर और बदनीयत से प्रेरित था।
Mohd Khan ने इसे ‘bogus case’ और ‘complete waste of time’ करार दिया, यह कहते हुए कि इतने घंटे की पूछताछ के बाद भी ठोस सबूत सामने नहीं रखे जा सके।
“कांग्रेस का संदेश साफ है – यदि FIR ही न्यायिक जांच के मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो उस पर बनी पूरी मनी लॉन्ड्रिंग की कहानी धराशायी हो जाती है।”
Gangs of Gandhinagar बेनकाब!
“प्रेस ब्रीफिंग में Pawan Khera ने एक बार फिर ‘Gangs of Gandhinagar’ शब्द का इस्तेमाल किया और आरोप लगाया कि इन ‘गैंग्स’ ने ED, CBI और IT जैसी एजेंसियों को अपनी ‘प्राइवेट आर्मी’ की तरह इस्तेमाल किया।
उनका कहना था कि ये साज़िश सिर्फ राहुल गांधी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे भारत के लोकतंत्र और जनता के खिलाफ है, क्योंकि विपक्ष को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है।
“कांग्रेस का नैरेटिव ये है कि जब भी केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार या नीतियों को लेकर सवाल उठते हैं, तब इन एजेंसियों के ज़रिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की जाती है।”
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Modi सरकार की गैरकानूनी चालें फ़ेल?
“कांग्रेस ने राहुल गांधी की ED के सामने पेशी और घंटों चली पूछताछ को ‘राजनीतिक विच हंट’ बताया और कहा कि यह सब उनकी आवाज़ दबाने के लिए किया गया, क्योंकि वे संसद और सड़कों पर आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।
ब्रीफिंग में यह भी कहा गया कि इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि ‘सच दब तो सकता है, लेकिन हार नहीं सकता।’
“पार्टी इसे अपने लिए ‘मोरल विंडिकेटशन’ की तरह पेश कर रही है और मैसेज दे रही है कि भविष्य में भी अगर एजेंसियों का इस तरह इस्तेमाल हुआ, तो वे राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ाई जारी रखेंगे।”
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“प्रेस ब्रीफिंग में यह आरोप दोहराया गया कि मोदी सरकार की राजनीति ‘वेंडेटा, इंटिमिडेशन और पॉलिटिकल पेरिक्यूशन’ पर टिकी है, जहां असहमति की हर आवाज को या तो चुप कराया जाता है या बदनाम किया जाता है।
कांग्रेस का कहना है कि 12 साल से ज़्यादा समय, हजारों घंटे की जांच और करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि केस टिक नहीं पाया, तो इसकी जवाबदेही सिर्फ सरकार और उसके शीर्ष नेतृत्व पर है।
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“यहां कांग्रेस सीधे मैसेज दे रही है कि अगर एजेंसियां राजनीतिक स्क्रिप्ट पर चलेंगी, तो अंत में अदालतों में जाकर वही स्क्रिप्ट फट जाएगी, और सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगेगा।”
अब सवाल ये है कि क्या इस फैसले के बाद ED और केंद्र सरकार अपनी रणनीति बदलेगी या फिर कोई नया तरीका निकाला जाएगा विपक्ष पर दबाव बनाने का?”
“दूसरा बड़ा सवाल – क्या इस केस के खत्म होने से राहुल गांधी की राजनीतिक विश्वसनीयता और नैरेटिव को नया बल मिलेगा, खासकर तब, जब विपक्ष पहले से ही ‘एजेंसी राज’ का मुद्दा उठा रहा है?”
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