Akhilesh Yadav ने FCRA Bill पर केंद्र सरकार से पूछा सवाल, भारतीय धन के विदेश जाने पर रोक क्यों नहीं?

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद Akhilesh Yadav ने सोमवार को ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल’ को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सरकार से भारतीय पैसे के विदेश जाने के बारे में सवाल किया और देश से बाहर जाने वाले फंड की मात्रा के बारे में पारदर्शिता की मांग की।

Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि जहाँ भारत में आने वाले विदेशी फंड पर पाबंदियाँ लगाई जाती हैं, वहीं विदेश जाने वाली भारतीय संपत्ति पर ऐसी कोई रोक-टोक नहीं है।

Akhilesh Yadav का आरोप, FCRA कानून का चुनिंदा तरीके से हो रहा इस्तेमाल

Akhilesh Yadav ने BJP सरकार पर अमीर वर्गों को फायदा पहुँचाने का आरोप भी लगाया और दावा किया कि FCRA जैसे कानूनों का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

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SP प्रमुख ने कहा, “सरकार को सबसे पहले यह बताना चाहिए कि भारत का कितना पैसा विदेश जा रहा है। विदेशी फंड लाने पर तो पाबंदियां हैं, लेकिन भारतीय पैसा कितना बाहर जा रहा है, इस पर कोई रोक-टोक नहीं है… जब से BJP सत्ता में आई है, अमीरों के ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं; बड़े लोग ही फल-फूल रहे हैं।

सरकार इस पर कब रोक लगाएगी? अगर वह ऐसा नहीं करती है, तो इसका मतलब है कि FCRA का इस्तेमाल सिर्फ़ अल्पसंख्यकों को परेशान करने या यह संदेश देने के लिए किया जा रहा है कि आतंकवाद और टेरर फ़ंडिंग के ख़िलाफ़ ‘सख़्त कार्रवाई’ हो रही है। जबकि असलियत यह है कि बहुत बड़ी मात्रा में भारतीय पैसा विदेश चला गया है।”

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Akhilesh Yadav के सवालों के बीच लोकसभा में फिर पेश हुआ FCRA संशोधन विधेयक 2026, विदेशी फंडिंग नियमों में बदलाव प्रस्तावित

मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को फिर से पेश किया गया। इस विधेयक का मकसद ‘विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010’ में संशोधन करना है, ताकि विदेशी योगदान के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके।

इसका उद्देश्य एक ‘नामित प्राधिकरण’ (Designated Authority) बनाना है। यह प्राधिकरण उन मामलों में विदेशी योगदान और ऐसी पूंजी से हासिल की गई संपत्तियों की देखरेख करेगा, जहां किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया हो, सरेंडर कर दिया गया हो या उसकी समय-सीमा समाप्त हो गई हो।

प्रस्तावित कानून में साफ़ तौर पर कहा गया है कि अगर ऐसी संपत्तियों में कोई पूजा स्थल शामिल है, तो तय अधिकारी को उसका धार्मिक स्वरूप बनाए रखना होगा। इसके अलावा, इसमें कानूनी उल्लंघनों के लिए अधिकतम सज़ा को पाँच साल की जेल से घटाकर एक साल करने का प्रावधान है।

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FCRA कानून कैसे करता है विदेशी फंडिंग और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित?

FCRA का ढांचा गैर-सरकारी संगठनों, धर्मार्थ संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक ट्रस्टों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019 और 2022 के बीच 13,520 संस्थाओं को कुल 55,741 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि मिली।15 जुलाई, 2026 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि देश में 14,449 सक्रिय एफसीआरए पंजीकरण चालू थे, जबकि 22,498 पंजीकरण रद्द हो गए थे और 15,212 की समय सीमा समाप्त हो गई थी।

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