Gaurav Gogoi ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल, Gyanesh Kumar को हटाने की मांग

कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने शुक्रवार को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर अपनी संवैधानिक शक्तियों से वंचित होने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि वे संविधान के प्रति नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति वफादारी दिखाते हुए काम कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन 28 अक्टूबर को एक ‘मॉक संसद’ (प्रतीकात्मक संसद) आयोजित करने की योजना बना रहा है, हालांकि इस कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। वहीं, देश भर में गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैलियां जारी हैं।

कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi ने कहा कि पार्टी की गतिविधियां, जिन्हें नवरात्रि, दशहरा और दुर्गा पूजा के दौरान कुछ समय के लिए रोक दिया गया था, अब फिर से शुरू हो गई हैं और उन्हें जनता का समर्थन मिल रहा है।

चुनाव आयोग में हेरफेर का आरोप

Gaurav Gogoi ने कहा, “हमें रोज़ ऐसी रिपोर्टें और ख़बरें मिल रही हैं कि भारत के चुनाव आयोग में पूरी तरह से हेरफेर की गई है, उसे खोखला कर दिया गया है, और उसके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया, “जिस तरह की रिपोर्टें सामने आ रही हैं, उससे ऐसा लगता है कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारत के संविधान की शपथ नहीं ली है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति वफादार रहने की शपथ ली है।” उन्होंने आगे कहा, “जो व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को संविधान और भारत की जनता से ऊपर रखता है, उसे किसी संवैधानिक पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है; ऐसे में ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ देना चाहिए।”

कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों का जवाब देते हुए गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री का बार-बार कांग्रेस नेता का ज़िक्र करना यह दिखाता है कि वे हर समय उन्हीं के बारे में सोचते रहते हैं।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री लगातार विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम ले रहे हैं। इससे पता चलता है कि राहुल गांधी और उनका डर श्री नरेंद्र मोदी जी के दिमाग में किस कदर बैठ गया है।”

Gaurav Gogoi ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री जनता, मध्यम वर्ग, छात्रों और मणिपुर सहित विभिन्न राज्यों तथा सूखे से प्रभावित क्षेत्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर बात करने के बजाय, बार-बार कांग्रेस और राहुल गांधी को ही क्यों निशाना बना रहे हैं।

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Gaurav Gogoi ने कहा, “वे किस बारे में बात कर रहे हैं? कांग्रेस, कांग्रेस, कांग्रेस, राहुल गांधी, राहुल गांधी, राहुल गांधी।” उन्होंने आगे कहा कि ‘राहुल गांधी का डर’ (फोबिया) ऐसा है कि प्रधानमंत्री को रात में नींद नहीं आती।

राजनीतिक बहस के दौरान 1970 के दशक के शिमला समझौते का जिक्र आने पर, गोगोई ने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया से साफ है कि वह बचाव की मुद्रा (डिफेंसिव मोड) में है।

उन्होंने कहा, “जब यह सरकार बचाव की मुद्रा में होती है, बैकफुट पर आ जाती है, तो ये 40-50 साल पीछे चले जाते हैं। इससे यही पता चलता है कि इस सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

Gaurav Gogoi ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह सरकार 2029 तक टिक पाएगी। उन्होंने भाजपा पर ‘विज़न की कमी’ (विज़न का दिवालियापन) का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा को सिर्फ ‘वोट चुराना’ और ‘चुनाव चुराना’ आता है।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ऐसी दिवालिया नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दिवालियापन के साथ यह सरकार 2029 तक टिक पाएगी। इस भाजपा सरकार में विज़न का पूरी तरह से दिवालियापन है।”

इसके अलावा, गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार पर आरोप लगाया कि वह गायक जुबीन गर्ग को न्याय दिलाने में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि सरमा ने विधानसभा में कई बार कहा था कि गर्ग की हत्या हुई थी, लेकिन गोगोई का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अदालत के सामने सभी तथ्य और सबूत पेश करने में नाकाम रहा।

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जमानत पर Gogoi ने SIT को घेरा

गोगोई ने दावा किया कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों को एक-एक करके जमानत मिल रही है, और उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर SIT का मकसद क्या है।

उन्होंने कहा, “लोगों के बीच यह आशंका है कि हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा गठित SIT का मकसद जुबीन गर्ग को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि उनकी मौत से जुड़े लोगों को बचाना था।”

उन्होंने आगे कहा कि इन घटनाओं से लोग दुखी और हैरान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्ग को न्याय न दिला पाना सरमा के राजनीतिक करियर पर सबसे बड़ा कलंक होगा।

गोगोई ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि हिमंत बिस्वा सरमा के लंबे राजनीतिक सफर में – जिसमें भ्रष्टाचार और ULFA से जुड़ी गतिविधियों जैसे कई आरोप शामिल हैं – उनके राजनीतिक करियर पर सबसे बड़ा कलंक और आज की तारीख में उनकी सबसे बड़ी विफलता यह होगी कि वे और उनकी सरकार जुबीन गर्ग को न्याय दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।”

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