India स्वदेशी जेट इंजन और लेज़र हथियारों के निर्माण की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है: रक्षा सचिव

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया है कि चीन जैसे पड़ोसी देशों ने एक ऐसी “संकर रक्षा और औद्योगिक मशीन” खड़ी की है

India के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हाल ही में अपने वक्तव्य में कहा कि रणनीतिक और नीतिगत दृष्टिकोण से हाल के सभी संघर्ष—ऑपरेशन सिंदूर, रूस-यूक्रेन युद्ध और इज़राइल-हमास संघर्ष—यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वायु शक्ति की सर्वोच्चता आधुनिक युद्ध का निर्णायक तत्व बन चुकी है। उन्होंने बताया कि अब सैन्य अभियानों का स्वरूप तेजी से नेटवर्क-केंद्रित (Network-Centric) हो रहा है, इसलिए भारत को अपनी रणनीतियों को नई तकनीकों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है।

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India अब रणनीतिक दबावों के आगे नहीं झुकेगा” — रक्षा सचिव

उन्होंने कहा कि India के रक्षा रणनीतिकार लंबे समय से वायु शक्ति की क्षमता को पहचानते आए हैं। भारत के दो परमाणु-सशस्त्र प्रतिद्वंद्वी हैं, जो अतीत में परमाणु धमकियों के माध्यम से रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब ऐसे दबावों के आगे नहीं झुकेगा।

राजेश कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार भारत ने कोविड-19 टीकों के निर्माण और डिजिटल भुगतान सेवाओं में वैश्विक स्तर पर सफलता पाई, उसी तरह अब देश स्वदेशी जेट इंजन निर्माण पर फोकस कर रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने उल्लेखनीय प्रगति की है और लंबी दूरी की मिसाइलों तथा तोपखाने के क्षेत्र में भारत अब दुनिया के शीर्ष 3–4 देशों में शामिल हो गया है।

India is moving rapidly towards manufacturing indigenous jet engines and laser weapons: Defence Secretary

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि India के पास अब लेजर हथियारों (Laser Weapons) का एक प्रोटोटाइप तैयार है, और सरकार इन उन्नत तकनीकों को तेज़ी से रक्षा प्रणाली में शामिल करने पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया है कि चीन जैसे पड़ोसी देशों ने एक ऐसी “संकर रक्षा और औद्योगिक मशीन” खड़ी की है जो केंद्रीय नियोजन और बाज़ार अनुशासन का मिश्रण है।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि India को अब पारंपरिक रूप से सार्वजनिक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से आगे बढ़कर निजी क्षेत्र की भूमिका को पूर्ण रूप से स्वीकार करना होगा। उनका मानना है कि भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां वह अपनी आर्थिक शक्ति और तकनीकी क्षमता के दम पर एक औद्योगिक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है — जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उसकी स्थिति के अनुरूप होगा।

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