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Farm Laws: अधिकांश किसान और विशेषज्ञ कृषि कानूनों के पक्ष में हैं, कृषि मंत्री तोमर

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New Delhi: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का 19 जनवरी की बैठक से पहले बयान सामने आया है। तोमर ने कहा, अधिकांश किसान और विशेषज्ञ कृषि कानूनों (Farm Laws) के पक्ष में हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, कानूनों (Farm Laws) को लागू नहीं किया जा सकता है। अब हम उम्मीद करते हैं कि किसान 19 जनवरी को कानून पर क्लॉज वाइज चर्चा करेंगे और सरकार को बताएंगे कि वे कानूनों को निरस्त करने के अलावा क्या चाहते हैं?

भारी संख्या में किसान कर रहे हैं कृषि कानूनों का समर्थन, बीजेपी सांसद

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर दिल्ली की बॉर्डर पर डटे किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) का आज आज 53वां दिन है। इसी बीच किसान संगठनों ने NIA के समन भेजे जाने की निंदा की है। किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार अत्याचार कर रही है। उसने किसानों का दमन शुरू कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री NIA मामले में देखने की बात कही थी। उनके आश्वासन के बाद भी NIA ने समन भेजा।

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा को NIA का समन

इससे पहले कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था, सरकार किसानों के खिलाफ NIA का इस्तेमाल कर रही है। NIA, ED, IT को बीजेपी ने अपना मुखौटा संगठन बना दिया है। खेदजनक बात ये है किसान बीजेपी के लिए आतंकवादी, एंटी नेशनल, पाकिस्तानी, चीनी और अर्बन नक्सल हो गए हैं, लेकिन किसान सरकार के सामने नहीं झुकेंगे। सीबीआई और ईडी नोटिस से किसान चुप नहीं बैठने वाले हैं। 

NIA के जरिए हमें डराने-धमकाने की कोशिश हो रही है

उधर, किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से गठित कमेटी के सामने नहीं जाएंगे और सरकार को कृषि कानून (Farm Laws) वापस लेना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) जारी रहेगा। एक अन्य किसान नेता ने कहा, तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ हम 26 जनवरी को दिल्ली के अंदर परेड करेंगे। दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर परेड की जाएगी। किसान शांतिपूर्ण ढंग से परेड करेंगे, उम्मीद है कि दिल्ली, हरियाणा पुलिस रोक नहीं लगाएगी।

बातचीत से पहले किसानों का शक्ति प्रदर्शन

बता दें कि किसान और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत होने के बाद भी ये मसला अब तक नहीं सुलझ पाया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए चार सदस्यीय कमेटी के गठन किया था। इसमें कोर्ट ने अशोक गुलाटी, प्रमोद कुमार जोशी, अनिल घनवंत और भूपेंद्र सिंह मान को शामिल किया था। हालांकि किसानों के विरोध के चलते भूपेंद्र सिंह मान ने अपना नाम वापस ले लिया। किसानों का कहना था कि कमेटी के चारों सदस्य पहले से ही कृषि कानूनों (Farm Laws) के समर्थन में है।

Supreme Court: किसानों की ट्रैक्टर रैली के खिलाफ अर्ज़ी पर कल सुनवाई

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New Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर किसान संगठनों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रेली के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई होगी। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने अर्ज़ी दाखिल कर कहा है कि गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा कार्यक्रम है। आंदोलन (Farmers Protest) के नाम पर देश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी की इजाज़त नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से दिल्ली पुलिस ने इस रैली पर रोक लगाने की मांग की है। कोर्ट ने इस अर्ज़ी पर किसान संगठनों को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।

Farmers Protest With Tractor March: बातचीत से पहले किसानों का शक्ति प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले हफ्ते हुई सुनवाई में किसान आंदोलन (Farmers Protest) में संदिग्ध संगठनों की सक्रियता पर भी संज्ञान लिया था। एक अर्ज़ी में कोर्ट को बताया गया था कि आंदोलन में कनाडा के संगठन ‘सिख फ़ॉर जस्टिस’ के बैनर लहरा रहे हैं। इस बात की आशंका है कि अलग खालिस्तान का समर्थक यह संगठन आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध करवा रहा है। कई देश विरोधी घटनाओं में संदिग्ध PFI भी आंदोलन को भड़काने में लगा है। चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस बात को गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र से जवाब दाखिल करने को कहा था। सुनवाई में इसकी भी चर्चा होगी।

सरकार-किसान संगठनों के बीच 9वें राउंड की बातचीत भी बेनतीजा

बता दें कि पिछले 53 दिनों से दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) जारी है। किसान और सरकार के बीच अब तक नौ दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकल पाया। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वो वापस नहीं जाएंगे। स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन किसान दिल्ली में ट्रैक्टर रैली (Tractor Rally) निकालेंगे। इस दौरान सभी ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगा होगा। साथ ही वो आउटर रिंग रोड पर मार्च करेंगे। इसके लिए हजारों ट्रैक्टरों को तैयार किया जा रहा है। योगेंद्र यादव ने साफ किया कि ये रैली राजपथ से बहुत दूर होगी, ऐसे में आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह में कोई व्यवधान पैदा नहीं होगा।

Farm Laws: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार को, 19 जनवरी को होगी समिति की बैठक

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New Delhi: शीर्ष अदालत (Supreme Court) तीन विवादास्पद कृषि कानूनों (Farms Law) और दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान प्रदर्शनों संबंधी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत गतिरोध को समाप्त करने के लिए बनाई गई समिति के एक सदस्य के स्वयं को अलग कर लेने के मामले पर भी गौर कर सकती है। 

वहीं अदालत दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई केंद्र सरकार की उस याचिका पर भी सुनवाई करेगी, जिसमें 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर प्रस्तावित ट्रैक्टर या ट्रॉली मार्च या किसी अन्य तरह के प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

Farmers Protest With Tractor March: बातचीत से पहले किसानों का शक्ति प्रदर्शन

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अगुवाई में न्यायालय की एक पीठ ने एक अंतरिम आदेश में अगले आदेश तक नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी और शिकायतों को सुनने तथा गतिरोध के समाधान पर अनुशंसा करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। 

समिति की बैठक 19 जनवरी को  

नए कृषि कानूनों (Farm Laws) पर उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति के यहां पूसा परिसर में 19 जनवरी को अपनी पहली बैठक करने का कार्यक्रम है। समिति के सदस्यों में शामिल अनिल घनवट ने रविवार को यह जानकारी दी। 

सरकार-किसान संगठनों के बीच 9वें राउंड की बातचीत भी बेनतीजा

शीर्ष न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों (Farm Laws) के क्रियान्वयन पर 11 जनवरी को अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी थी। साथ ही, न्यायालय ने गतिरोध का हल निकालने के लिए चार सदस्यीय एक समिति भी नियुक्त की थी। हालांकि, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान पिछले हफ्ते समिति से अलग हो गए थे। 

On Farm Laws Hearing in Supreme Court on Monday and Committee meeting on January 19
समिति से भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को अलग किया

SC द्वारा बनाई गयी समिति से भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को अलग किया

बता दें कि नए कृषि कानूनों (Farm Laws)  के खिलाफ किसान दिल्ली की सीमाओं पर पिछले करीब 53 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। घनवट के अलावा, कृषि-अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और प्रमोद कुमार जोशी समिति के दो अन्य सदस्य हैं। शेतकारी संगठन (महाराष्ट्र) के प्रमुख घनवट ने कहा कि हम लोग पूसा परिसर में 19 जनवरी को बैठक कर रहे हैं। भविष्य की रणनीति पर फैसला करने के लिए सिर्फ सदस्य ही बैठक में शामिल होंगे।

Farm Laws: NIA के जरिए हमें डराने-धमकाने की कोशिश हो रही है

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New Delhi: किसान नेताओं ने कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि पंजाब और दूसरी जगह में एनआईए (NIA) ने कुछ केस बनाने शुरू किए है। एनआईए (NIA) हमारी मदद करने वालों पर राजद्रोह का केस बना रही है। उन्होनें कहा कि सरकार के साथ बैठक में हमें सबसे पहले ये बात रखी थी। तब तोमर जी ने वादा किया था की हम संज्ञान लेंगे। आज संयुक्त किसान मोर्चा इस मामले की निंदा करता है। हम हर तरह से इसका मुकाबला करेंगे।

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा को NIA का समन

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान मार्च का आयोजन 26 जनवरी को दिल्ली के अंदर होगा। आऊटर रिंग रोड़ पर दिल्ली की परिक्रम करके ये मार्च किया जाएगा। हम आशा करते है दिल्ली और हरियाणा की पुलिस इसमें कोई बाधा ना करे। उन्होनें कहा कि यह परेड शांति पुण रहेगी, किसी प्रकार का हथियार और भडकाऊ भाषण नही होगें। योगेंद्र यादव ने कहा कि गणतंत्र दिवस की परेड पर कोई विघन नही डाला जाएगा। योगेंद्र यादव ने कहा कि किसी चीज पर कब्जा नही किया जाएगा। लाल किला, संसद भवन पर कब्जे करने की जो बात हो रही है ऐसा कुछ नही होने वाला है। 

Farmers Protest With Tractor March: बातचीत से पहले किसानों का शक्ति प्रदर्शन

किसान नेता ने कहा कि 19 जनवरी को सरकार से साथ बैठक पर कृषि मंत्री का बयान बता रहा है की देश के किसान इस कानून (Farm Laws) से खुश है। जो सरकार की मंशा बताता है। हम 19 को जवाब लेने जरूर जायेंगे। ऐसा बिल्कुल नही लगने देंगे की किसान बातचीत के लिए तैयार नही है।

किसान यूनियनों के नेता केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।

Farmers Protest: भारी संख्या में किसान कर रहे हैं कृषि कानूनों का समर्थन, बीजेपी सांसद

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Ballia: उत्तर प्रदेश (UP) के बलिया (Ballia) में बीजेपी सांसद एवं भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त ने किसान आंदोलन (Farmers Protest) को लेकर कहा कि देश और दुनिया में जितने भी किसान आंदोलन (Farmers Protest) हुए हैं उसका चुनावी राजनीति से कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने कहा कि एक किसान होने के नाते ”मैं कह सकता हूं कि ये जो किसान कानून बना है उसका भारी संख्या में किसानों का समर्थन है. ये पूरे देश के किसानों का आंदोलन नहीं है. किसान आंदोलन (Farmers Protest) के नाम पर बिहार के चुनाव में मिली हार के बाद बंगाल के चुनाव का रिहर्सल है.”

BJP विधायक बोले- दिल्ली में किसान नहीं, खालिस्तान व पाकिस्तान जिंदाबाद वाले बैठे हैं

बता दें हाल ही में बीजेपी सांसद ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि ”कुछ हरामखोरों ने किसानों के मन में शंका पैदा कर दी है. वे आंदोलन (Farmers Protest) करने वाले किसानों को भड़का रहे हैं. किसान कल्याण मिशन के अंतर्गत गाजीपुर जिले के भांवरकोल ब्लॉक मुख्यालय और बाराचवर स्थित रामलीला मैदान में बुधवार को कृषि विभाग की ओर से किसान मेला, गोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था. इसमें सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि था कि ”किसान आंदोलन (Farmers Protest) कर रहे हैं और कुछ हरामखोरों ने किसानों के मन में शंका पैदा कर दी है, इससे किसान चिंतित हैं.”

बीजेपी ने नए कृषि कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने की व्यापक प्लानिंग की

वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा ये भी कहा था कि ”20 हजार लोग मिलकर कानून बदलने की बात कर रहे हैं. इन लोगों को कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका पर भरोसा नहीं है. ये लोग लोकतंत्र की बात कर रहे हैं.”

Farmers Protest: किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा को NIA का समन

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New Delhi: किसान आंदोलन (Farmers Protest) का आज (16 जनवरी) 52वां दिन है। 26 नवंबर से किसान कड़कड़ती ठंड में कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दौरान लगभग 60 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। सरकार अपनी जिद्द पर अड़ी और किसान भी मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 

किसानों ने लोहड़ी पर्व पर नये कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया।

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा को 17 जनवरी को दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में पेश होने को कहा है। इसके बाद सिरसा ने कहा कि किसानों का समर्थन करने की कीमत चुका रहा हूं। सरकार विरोध को दबाने के लिए मेरी बोली लगा रही है। इसलिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

26 जनवरी को बड़े आंदोलन की तैयारी में किसान, पंजाब में हजारों वॉलंटियर जुड़े

उधर, एनआईए (NIA) का कहना है कि सिरसा से ‘सिख फॉर जस्टिस’ के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ दर्ज मामले से संबंधित पूछताछ करनी है। पन्नू पर ‘भय और अराजकता का माहौल बनाकर लोगों में असंतोष पैदा कर उन्हें भारत सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाने’ का आरोप है।

वहीं, सिरसा ने इस समन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार किसान आंदोलन (Farmers Protest) को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जरिये आंदोलन (Farmers Protest) को कमजोर करने की कोशिश की और अब यह एनआईए (NIA) का सहारा ले रही है। इससे पहले मंगलवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सरकार को जानकारी मिली है कि किसान आंदोलनों (Farmers Protest) में खालिस्तान समर्थित लोग घुसे हुए हैं। हालांकि, किसानों की मौत पर सरकार ने चुप्पी साधी हुई है। 

BJP विधायक बोले- दिल्ली में किसान नहीं, खालिस्तान व पाकिस्तान जिंदाबाद वाले बैठे हैं

सिरसा ने आगे कहा, “हमें इससे फर्क नहीं पड़ता। हम झुकेंगे नहीं। NIA दिन रात काम कर 26 जनवरी को होने वाली किसान परेड रोकने की कोशिश कर रही है। वहीं सरकार इस आंदोलन (Farmers Protest) को बदनाम करने पर अड़ी हुई है।”

देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) शनिवार को 52वें दिन जारी है। कृषि सुधार पर तकरार के बीच आंदोलन की राह पकड़े किसानों की अगुवाई करने वाले यूनियन और सरकार से नौ बार मिल चुके हैं, फिर भी मन नहीं मिला है। नये कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर किसानों के मन में पैदा हुई आशंकाओं का समाधान तलाशने के लिए किसान यूनियनों के नेताओं के साथ शुक्रवार को करीब पांच घंटे मंथन के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकलने पर सरकार को फिर मिलने की अगली तारीख तय करनी पड़ी। अब 19 जनवरी को फिर अगले दौर की वार्ता होगी।

बीजेपी ने नए कृषि कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने की व्यापक प्लानिंग की

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने शनिवार को कहा कि वह रविवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के समक्ष पेश नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उनकी पोती की शादी है और इसी सिलसिले में वह सात फरवरी तक पारिवारिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे।उन्होंने कहा कि उन्हें शॉर्ट नोटिस पर व्हाट्सएप (Whatsapp) पर नोटिस मिला है। सिरसा ने स्पष्ट किया कि एजेंसी की ओर से उन्हें तलब किए जाने से संबंधित कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।

दरअसल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में किसान संगठन के नेता बलदेव सिंह सिरसा को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी (एलबीआईडब्ल्यूएस) के अध्यक्ष सिरसा का संगठन उन किसान संगठनों में शामिल है, जो केंद्र के साथ बातचीत में शामिल है।

सरकार-किसान संगठनों के बीच 9वें राउंड की बातचीत भी बेनतीजा

एनआईए (NIA) के समन के अनुसार, बलदेव सिंह सिरसा को 17 जनवरी को पूछताछ के लिए एजेंसी के सामने पेश होना है। यहां मीडिया से बात करते हुए सिरसा ने केंद्र सरकार पर विभिन्न तरीकों को अपनाकर किसानों के विरोध प्रदर्शन (Farmers Protest) को पटरी से उतारने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

UP: दुष्कर्म (Rape) का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाला गिरफ्तार

UP:  उत्तर प्रदेश (UP) के प्रतापगढ़ जिले के थाना लालगंज कोतवाली पुलिस में एक महिला अधिकारी ने शाहजहांपुर के एक आदमी के खिलाफ उसके साथ कथित दुष्कर्म (Rape) कर अश्लील वीडियो बनाने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने इसकी जानकारी देते हुये बताया कि आरोपी को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

नाबालिग से जानकार ने दोस्तों के साथ मिलकर किया गैंगरेप

थाना प्रभारी और पुलिस निरीक्षक राम आधार ने बताया कि लालगंज तहसील में तैनात एक महिला अधिकारी ने बीते दो जनवरी को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि शाहजहांपुर जिले के बसंतपुर निवासी गुरविंदर सिंह कोचिंग के दौरान उनके साथ मारपीट एवं छेडछाड़ करता था और इस दौरान उसने अधिकारी का आपत्तिजनक वीडियो का फोटो तैयार कर कोचिंग में उसे दिखाया।

तीन साल की बच्ची के साथ गैंगरेप, तीनों आरोपी नाबालिग

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान उसकी नौकरी बरेली के एक बैंक में लग गयी और जब वह बरेली में रहती थी तो आरोपी वहां पहुंच कर उसके साथ जबरदस्ती (Rape) करता था। अधिकारी ने बताया कि इसी दौरान पीसीएस परीक्षा पास करने के बाद उसे 2017 में प्रतापगढ़ में तैनाती मिली।

दो सगी बहनों से मकान मालिक ने किया Rape

पुलिस निरीक्षक ने बताया कि महिला अधिकारी के अनुसार आरोपी यहां भी आफ़िसर्स कॉलोनी पहुंच कर उसे परेशान करता था। गत 18 दिसंबर 2020 को गुरविंदर सिंह अपने दो साथियों के साथ आफिसर्स कॉलोनी आया और जोर जबरदस्ती (Rape) का प्रयास किया। बाद में शोर मचाने के बाद वह सब भाग निकले। थाना प्रभारी ने बताया कि मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और विधिक कार्यवाही की जा रही है।

Corona Vaccination: पहले दिन 1.65 लाख लोगों को लगाया गया कोरोना का टीका

New Delhi: देश में 16 जनवरी से शुरू हुए कोरोना के टीकाकरण (Corona Vaccination) अभियान के पहले दिन कितने लोगों को टीका लगा, क्या कोई साइड इफेक्ट या कोई और दिक्कत सामने आई, हर राज्य में कहां-कहां क्या स्थिति रही. इसकी जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस करके दी. केंद्र सरकार ने कहा कि सारे देश में 3351 केंद्रों में 1 लाख 65 हजार 714 लोगों को शाम 5.30 बजे तक पहले दिन टीका (Corona Vaccination) लगाया गया. 11 राज्यों में दोनों किस्म के टीके लगाए गए, जिनमें असम, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक जैसे राज्य इसमें शामिल रहे. बाकी राज्यों में सिर्फ सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड लगाई गई. कोरोना की दूसरी वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सिन है.

शुरुआत में कोविन एप्लीकेशन का इस्तेमाल स्वास्थ्यकर्मियों तक ही सीमित रहेगा

शाम 7:00 बजे स्वास्थ्य मंत्रालय एडिशनल सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेट्री  ने यह प्रेस कान्फ्रेंस की. अधिकारियों ने बताया कि देश भर में कोविड का टीका लगने के बाद किसी को भी अस्पताल में भर्ती कराने जैसी जरूरत नहीं पड़ी. कोरोना टीकाकरण (Corona Vaccination) की निगरानी कराने वाले ऐप कोविन की स्पीड कम होने जैसी कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, जिन्हें दूर कर लिया गया. इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार शाम 6:00 बजे देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक भी की. पहले दिन करीब तीन लाख स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों को टीका (Corona Vaccination) लगने का अनुमान था, लेकिन यह आंकड़ा कम रहा.

कोरोना वैक्सीन के लिए Co-WIN ऐप पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन

दरअसल, कोरोना फैलने के शुरुआती दिनों मे भी इसी तरह केंद्र की ओर से जानकारी साझा की गई थी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि वह अगले 2 हफ्ते तक रोजाना इसी तरह शाम 6:30 बजे प्रेस ब्रीफिंग करके टीकाकरण (Corona Vaccination) अभियान का स्टेटस बताएगा. दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शनिवार को पहले दिन 45 स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगे. 

Indonesia Earthquake: अब तक 42 लोगों की मौत 800 से अधिक घायल

Jakarta: इंडोनेशिया के पश्चिम सुलावेसी प्रांत में आए 6.2 तीव्रता के भूकंप (Earthquake) में अब तक 42 लोगों की मौत हो गई है. वहीं 800 से अधिक लोग घायल हो गए हैं. भूकंप (Earthquake) प्रभावित क्षेत्र से 15,000 लोगों को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है. अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि भूकंप के कारण घरों और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है.

इस भूकंप (Earthquake) का केन्द्र पश्चिम सुलावेसी प्रांत के मामुजु जिले में 18 किलोमीटर की गहराई में था। इसी क्षेत्र में बृहस्पतिवार को समुद्र के अंदर 5.9 की तीव्रता का भूकम्प (Earthquake) आया था। इंडोनेशिया की आपदा एजेंस ने बताया कि 8 लोगों की घर और इमारतें गिरने से मौत हो गई। केवल मजेने जिले में ही 600 लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि वहां 300 घर बर्बाद हो गए हैं और 15 हजार लोगों को आश्रयों में शरण लेनी पड़ी है। 

वहीं शुक्रवार को मामुजू शहर और मजेने जिले में आए भूकंप के बाद आने घायल हुए लोगों का फील्ड हॉस्पिटल और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. प्रवक्ता ने खुलासा किया कि, मामुजू में 189 लोगों को गंभीर चोटें आईं और 639 लोगों को मामूली चोटें आई हैं. समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया, “जिन मरीजों का इलाज प्रभावित अस्पतालों में किया गया था, उन्हें अब फील्ड अस्पतालों में भेज दिया गया है.”

टीवी चैनलों की खबर के अनुसार भूकम्प (Earthquake) से एक अस्पताल का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और मरीजों को बाहर अस्थायी आपात तंबुओं में पहुंचाया गया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि करीब दो हजार लोगों को कई अस्थायी आश्रय स्थलों में रखा गया है। उसने बताया कि शुक्रवार तड़के आए भूकम्प (Earthquake) की तीव्रता 6.2 थी। 

प्रांतीय सामाजिक कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, भूकंप (Earthquake) ने मामुजू में मित्रा मनकारा अस्पताल को तबाह कर दिया है. प्रवक्ता ने कहा कि स्थानांतरित किए गए लोगों को 10 निकासी केंद्रों में ठहराया गया है, और प्रभावित लोगों को आपातकालीन राहत सामग्री भेजी गई है.

वहीं खतरे का मूल्यांकन और प्रभावित लोगों को स्थानांतरित किए जाने का काम वर्तमान में जारी है. अधिकारियों के अनुसार, पिछले 30 दिनों में इंडोनेशिया में 6.0 या उससे अधिक तीव्रता के तीन भूकंप (Earthquake), 5.0 और 6.0 के बीच तीव्रता के 22 भूकंप, 4.0 और 5.0 के बीच तीव्रता के 143 झटके, 3.0 और 4.0 के बीच 367 झटके और 2.0 और 3.0 के बीच 247 झटके आए हैं.

भूकंप (Earthquake) से साल 2019 में 26 सितंबर को करीब 41 लोग मारे गए थे, जबकि 1,578 अन्य घायल हुए थे और करीब 150,000 से अधिक लोगों को स्थानांतरित किया गया था. तब भूकंप की तीव्रता 6.5 थी.

Farm Laws: सरकार-किसान संगठनों के बीच 9वें राउंड की बातचीत भी बेनतीजा

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New Delhi: कृषि कानूनों (Farm Laws) पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच हुई नौवें दौर की बातचीत भी आज बेनतीजा रही. दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के कार्यान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है.

किसानों ने लोहड़ी पर्व पर नये कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया।

शीर्ष अदालत ने इस मामले में गतिरोध को समाप्त करने के लिये चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन किसान संगठनों ने इस समिति को सरकार समर्थक बताया है और साफ कहा है कि वे सरकार से तो बारबार चर्चा को तैयार हैं लेकिन समिति के समक्ष नहीं जाएगा.  

बातचीत से पहले किसानों का शक्ति प्रदर्शन

किसानों का कहना है कि समिति के सदस्‍य पहले ही सरकार के कृषि कानूनों (Farm Laws) के पक्ष में राय दे चुके हैं. इस बीच समिति के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान ने समिति से अपने को अलग कर लिया है.

SC द्वारा बनाई गयी समिति से भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को अलग किया

शुक्रवार की बातचीत के बारे में बात करते हुए ऑल इंडिया किसान सभा पंजाब के अध्यक्ष बालकरण सिंह बरार ने कहा, इस बैठक में भी कोई नतीजा नहीं निकल सका. सरकार अपनी बात पर अड़ी हुई है कि तीनों कानून (Farm Laws) रद्द नहीं होंगे. हमने सरकार को सुझाव दिया कि इस एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट में जो संशोधन सरकार ने किए हैं, उन्हें सरकार वापस ले ले. पूरे कानून को रद्द करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस पर कृषि मंत्री ने कोई आश्वासन नहीं दिया. अब अगली बैठक 19 जनवरी को विज्ञान भवन में होगी 26 जनवरी के दिन हमारी ट्रैक्टर रैली (Tractor Rally) निकाली जाएगी अगले 2 दिन में हम ट्रैक्टर रैली की रूट और अपने विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा फाइनल कर लेंगे, इसमें कुछ छुपा हुआ नहीं है. बरार ने कहा कि 26 जनवरी के विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम को हम जल्‍द ही सार्वजनिक करेंगे.

26 जनवरी को बड़े आंदोलन की तैयारी में किसान, पंजाब में हजारों वॉलंटियर जुड़े

किसान संगठनों का साफ कहना है कि हम मध्‍यस्‍थ नहीं चाहते, हम सीधे सरकार के साथ बातचीत चाहते हैं. यही नहीं, उन्‍होंने सरकार से किसानों का समर्थन करने वालों के पीछे केंद्रीय एजेंसी लगाने से भी ‘बाज आने’ को कहा है. 

दो सगी बहनों से मकान मालिक ने किया Rape, पुलिस केस दर्ज करने में करती रही आनाकानी

Pilibhit: पीलीभीत में दो सगी नाबालिग बहनों के साथ में एक 65 वर्षीय शख्स ने दुष्कर्म (Rape) की वारदात को अंजाम दिया. मामले में पुलिस ने लापरवाही दिखाते हुये मामला दर्ज करने में ढिलाई बरती. लेकिन एसपी के बाद शिकायत पहुंचने पर आरोपी सतनाम सिंह उर्फ कारमेट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. वहीं, एसपी ने पीड़िता की सुनवाई न करने वाले आरोपी थानाध्यक्ष के खिलाफ़ भी जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं. घटना थाना हजारा क्षेत्र के भुर्जगुनिया गांव की है.

नाबालिग से जानकार ने दोस्तों के साथ मिलकर किया गैंगरेप

दरअसल थाना हजारा क्षेत्र की रहने वाली दोनों नाबालिग लड़कियां अपने परिवार के साथ आरोपी सतनाम सिंह के घर रहकर मजदूरी कर अपना पालन पोषण करती थीं. जिनका आरोप है कि 65 वर्षीय आरोपी मकान मालिक एक साल से उसकी बड़ी बहन के साथ दुष्कर्म (Rape) करता रहा, जिससे उसकी तबीयत खराब हो गई. उसके बाद छोटी बहन के साथ भी आरोपी ने रेप (Rape) किया. जिसको लेकर जानकारी होने पर पीड़ित परिवार ने थाने पर मामले की शिकायत की.

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पीड़ित परिजनों का आरोप है कि दो महीने से लगातार न्याय के लिए थाने के चक्कर काटने के बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत तहसील दिवस में की थी. जिसके बाद सात दिनों की चली जांच में पुलिस अधीक्षक ने आरोपी के खिलाफ थाने में गम्भीर धाराओं में केस दर्ज करवा कर रिपोर्ट न लिखने वाले थानाध्यक्ष के खिलाफ भी जांच कर कार्रवाई की बात कही है.

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पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश ने बताया कि थाना हजारा के अन्तर्गत एक प्रार्थना पत्र के आधार पर 376 का अभियोग पंजीकृत किया गया है. इस प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी पूरनपुर द्वारा की जा रही थी. जांच के दौरान यह पता चला कि, बच्चियों द्वारा समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया गया था. जिसको लेकर मामले में सभ्रांत व्यक्तियों द्वारा घटना का समझौता भी करवा दिया गया था, जो कि गलत था. थानाध्यक्ष को पीड़िया की तहरीर पर एफआईआर (FIR) दर्ज करके जांच करनी चाहिए थी, जो उसने नहीं किया. फिलहाल मामले में केस दर्ज कर जांच की जा रही है, और लापरवाह थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच करवाकर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

Rupesh Murder: सुशील मोदी रूपेश के परिजनों से मिले, बेटी लिपटकर रोने लगी।

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सुशील मोदी गुरुवार को छपरा में रूपेश के परिजनों से मिलने के लिए पहुंचे तो मृतक की बेटी उनसे लिपटकर रोने लगी। नन्ही सी बच्ची आराध्या को रोता देख सुशील मोदी की आंखें भी नम हो गईं।

In Rupesh Murder case Sushil Modi met Rupesh's family
नन्ही सी बच्ची आराध्या को रोता देख सुशील मोदी की आंखें भी नम हो गईं।

बच्ची ने सांसद से कहा कि अपराधी पकड़े जाएंगे तो उसकी मम्मी उन्हें पहली गोली मारेगी। 

मोदी से बच्ची ने कहा कि मैं रोई नहीं क्योंकि मम्मी को बुरा लगेगा। उसने कहा कि उसे केवल अपने पिता के लिए न्याय चाहिए। पूर्व उपमुख्यमंत्री रूपेश के गांव संवरी बख्शी पहुंचे थे। यहां उन्होंने उनके परिजनों से मुलाकात करने के बाद कहा कि जल्द ही रूपेश के हत्यारे पकड़े जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार विशेष कार्य कर रही है। उन्होंने रूपेश के परिजनों से मिलकर संवेदना जताई। 

Rupesh Murder: सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़के

हत्याकांड में अबतक क्या हुआ 

पुलिस लगातार इस हत्याकांड की तफ्तीश कर रही है। सूत्रों के अनुसार हत्यारे पटना हवाई अड्डे से ही रूपेश के पीछे लगे हुए थे। हालांकि उन्हें पूरे रास्ते मौका नहीं मिला और आखिर में उन्होंने रूपेश को उनके अपार्टमेंट के बाहर ही गोली मार दी। पटना पुलिस की एक टीम गुरुवार को छानबीन करने के लिए हवाई अड्डे भी पहुंची। पुलिस को इस केस में कुछ अहम सुराग मिले हैं। इन्हें फिलहाल जाहिर नहीं किया गया है। इसके अलावा उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार है।

Rupesh Murder: सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़के

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बिहार की राजधानी पटना में इंडिगो एयरलाइंस के स्टेशन मैनेजर रूपेश सिंह की हत्या (Rupesh Murder) के बाद जनता में काफी आक्रोश है। पटना के अलावा छपरा में स्थित उनके आवास पर भी मातम पसरा हुआ है. वहीं घटना पर सवाल पूछे जाने पर सूबे के मुख्यमंत्री नाराज हो गए। इतना ही नहीं उन्होंने डीजीपी को पत्रकारों के सामने ही फोन मिला दिया। 

सवाल पूछे जाने पर भड़के नीतीश कुमार, डीजीपी को मिलाया फोन 

रूपेश हत्याकांड (Rupesh Murder) पर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़क गए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आपको जानकारी है तो बताइए। रूपेश के हत्यारे नहीं बचेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने पत्रकारों से पूछ लिया कि आप किस पार्टी से हैं। बिहार में 15 साल जब अपराध होता था तब कोई नहीं बोलता था। आज अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है।

बक्सर में घर के बाहर बैठे पूर्व सरपंच की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या

नीतीश ने कहा कि स्पेशल टीम मामले की जांच कर रही है। हत्या के पीछे कोई न कोई कारण होता है। अगर आपको पास किसी अपराध के बारे में जानकारी है तो सीधा हमें बताइए।

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पत्रकारों ने जब मुख्यमंत्री से पूछा कि आखिर वे किसे सूचना दें तो इसपर नीतीश ने कहा कि आप सीधे बिहार के डीजीपी को जानकारी दीजिए। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि बिहार के डीजीपी फोन नहीं उठाते हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने खुद डीजीपी को फोन मिलाया। मुख्यमंत्री के फोन को डीजीपी एसके सिंघल ने दो रिंग के बाद ही उठा लिया। फिर नीतीश ने उनसे कहा कि डीजीपी साहब फोन उठाया करिए। 

CoWIN: शुरुआत में कोविन एप्लीकेशन का इस्तेमाल स्वास्थ्यकर्मियों तक ही सीमित रहेगा

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) कल सुबह 10.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के जरिये देशभर के 3600 अलग अलग केंद्रों पर कोविड-19 वैक्सीन (Covid Vaccination) अभियान की शुरुआत करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री CoWIN मोबाइल एप्लीकेशन भी जारी करेंगे. CoWIN एप्लीकेशन बैकएंड से चलकर लाभार्थी तक इस वैक्सीन के पहुंचने का पूरा ब्यौरा रखेगी. हालांकि शुरुआत में केंद्र और राज्य के स्तर पर CoWIN मोबाइल एप्लीकेशन का सीमित इस्तेमाल ही हो पाएगा.

आम जनता के लिए एक महीने बाद उपलब्ध होगी CoWIN एप्लीकेशन

इस अभियान से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, “आम जनता के लिए ‘CoWIN’ एक महीने के अंदर उपलब्ध कर दिया जाएगा. आम जनता ऑनलाइन वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन दोनों ही के द्वारा इसका इस्तेमाल कर सकती है.” कोरोना के खिलाफ कल से शुरू हो रहे अभियान में CoWIN एप्लीकेशन बेहद महत्वपूर्ण है. इस अभियान की योजना, उसको लागू करने और इस पर नजर बनाए रखने का कार्य इस एप्लीकेशन के जरिए किया जाएगा.

कोरोना वैक्सीन के लिए Co-WIN ऐप पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन

शुरुआत में इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल स्वास्थ्यकर्मियों तक ही सीमित रखा गया है. इस दौरान ये स्वास्थ्यकर्मी इस एप्लीकेशन पर अपनी जानकारी दे पायेंगे और साथ ही अपनी वैक्सीनेशन (Covid Vaccination) से जुड़ी जानकारी ले पाएंगे. लगभग एक करोड़ स्वास्थ्यर्मियों का नाम पहले से ही इस प्लेटफ़ॉर्म पर दर्ज किया जा चुका है.

भारत में दुनिया का सबसे बड़ा Covid-19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होगा

क्या है CoWIN एप्लीकेशन

कोरोना महामारी से बचने के लिए जल्द ही पूरे भारत में टीकाकरण अभियान की शुरुआत की जाएगी. ऐसे में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से CoWIN ऐप को लॉन्च किया जाएगा. इस ऐप के जरिए कोविड-19 वैक्सीन (Covid Vaccination) के लिए फ्री रजिस्ट्रेशन कर पाएंगे. को-विन ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त उपलब्ध होगा. वहीं इस ऐप के जरिए किसी शख्‍स के वैक्‍सीन लेने के बाद किसी भी संभावित साइड इफेक्ट पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. दरअसल, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से कोविड-19 के इलाज के लिए दो वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है. जिनमें कोविशील्ड और कोवैक्सीन शामिल हैं.

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तीन चरणों में किया जाएगा वैक्सीनेशन 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोविड-19 का वैक्सीनेशन (Covid Vaccination) तीन चरणों में किया जाएगा. पहले चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल होंगे. इसके बाद इमरजेंसी वर्कर्स का वैक्सीनेशन होगा. वहीं, तीसरे चरण में वैसे लोग जो पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित हैं, उनका वैक्सीनेशन किया जाएगा. बता दें कि एक व्यक्ति के वैक्सीनेशन का समय लगभग 30 मिनट का हो सकता है.

CBI ने करप्शन केस में अपने ही 4 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की FIR

New Delhi: केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने गुरुवार को अपने ही चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इनमें डीएसपी, इन्स्पेक्टर, स्टेनो और एडवोकेट शामिल हैं।

चारों अधिकारियों पर कुछ विशिष्ट मामलों की जांच के दौरान बाहरी आर्थिक लाभ के विचार से समझौता करने का आरोप लगाया गया है। सीबीआई (CBI) ने इस संबंध में 14 स्थानों पर छापेमारी की थी। केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से अपने ही अधिकारियों के खिलाफ अचानक ऐक्शन लेने से हर कोई सकते में आ गया।

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जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और नोएडा समेत कई इलाकों में दिल्ली के सीबीआई (CBI) अफसरों के घर पर बुधवार को अचानक से छापेमारी की गई थी। भ्रष्टाचार के आरोप में गाजियाबाद में सीबीआई के बड़े अधिकारी के घर छापे की खबर सबसे पहले आई। पूर्व अधिकारी के फ्लैट को चारों तरफ से घेर कर सीबीआई (CBI) ने तलाशी की। इसके अलावा दिल्ली और नोएडा में भी सीबीआई के दूसरे अफसरों के घर पर छापे मारे गए।

गाजियाबाद के अलावा नोएडा और दिल्ली के कई ठिकानों पर भी सीबीआई (CBI) की टीमें पहुंचीं। एक मामले से जुड़े अन्य सीबीआई अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई। गुरुवार शाम को सीबीआई (CBI) की टीम ने अपने ही चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले में और जानकारी की प्रतीक्षा है।

Google ने Play Store से हटाईं कई Personal Loan App, सुरक्षा नीति का कर रही थीं उल्लंघन

New Delhi:  प्रौद्योगिकी क्षेत्र (Technology Sector) की दिग्गज कंपनी गूगल (Google) ने भारत में सैकड़ों की संख्या में व्यक्तिगत ऋण ऐप (Personal Loan App) की समीक्षा की है और इनमें से कई को अपने प्ले स्टोर (Play Store) से हटा दिया है। प्रयोगकर्ताओं और सरकारी एजेंसियों ने कंपनी से इन ऐप को लेकर चिंता जताई थी।

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गूगल ने बृहस्पतिवार कहा कि जो व्यक्तिगत ऋण ऐप (Personal Loan App) उपयोक्ता सुरक्षा नीतियों का उल्लंघन कर रही थीं, उन्हें तत्काल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है। गूगल ने शेष ऐप के डेवलपर्स से कहा है कि वे यह दर्शाएं कि किस तरीके से स्थानीय कानूनों और नियमनों का अनुपालन कर रहे हैं। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनकी व्यक्तिगत ऋण ऐप (Personal Loan App) को भी प्ले स्टोर से हटा दिया जाएगा। 

Google Meet पर वीडियो कॉलिंग के लिए आया शानदार फीचर

गूगल (Google) ने ब्लॉगपोस्ट में कहा, ‘‘गूगल के उत्पादों तक सुरक्षित अनुभव प्रदान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी वैश्विक उत्पाद नीतियां इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर डिजाइन और क्रियान्वित की गई हैं। हम प्रयोगकर्ता की सुरक्षा में सुधार के लिए लगातार काम कर रहे हैं।’’ हालांकि, गूगल ने यह नहीं बताया कि उसने किन व्यक्तिगत ऋण ऐप (Personal Loan App) को हटाया है। 

ब्लॉगपोस्ट में कहा गया है, ‘‘हमने भारत में सैकड़ों की संख्या में व्यक्तिगत ऋण ऐप (Personal Loan App) की समीक्षा की। इनको लेकर प्रयोगकर्ताओं और सरकारी एजेंसियों ने चिंता जताई थी। प्रयोगकर्ता सुरक्षा नीति का उल्लंघन कर रही ऐप को प्ले स्टोर से तत्काल हटा दिया गया है।’’

16 जनवरी को वैक्सीन देश को समर्पित करेंगे PM Modi, CO-WIN ऐप भी होगा लॉन्च

New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार यानी 16 जनवरी को देश के आम लोगों को वैक्सीन (Corona Vaccine) समर्पित करेंगे. इसकी शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये करेंगे. सूत्रों की मानें तो सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री मोदी इसकी शुरुआत कर सकते है.

PM Modi मोबाइल एप्लीकेशन जारी कर सकते हैं

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी को-विन (Co-Win) मोबाइल एप्लीकेशन को भी आम लोगों के लिए जारी कर सकते हैं। ताकि आम लोग वैक्सीन (Corona Vaccine) के लिए अपने को उस एप के जरिये रजिस्टर्ड कर सकें।

कोरोना वैक्सीन के लिए Co-WIN ऐप पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन

माना जा रहा है कि इस लांचिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग (Video Conferencing) में देश के अलग अलग केंद्रों से दस ऐसे लोग जुड़ेंगे. जिन्होंने ट्रायल के दौरान वैक्सीन (Corona Vaccine) ली है. वो प्रधानमंत्री मोदी को अपने अनुभव बताएंगे. साथ ही भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक, देश के अलग अलग वैक्सीन प्रदाता अस्पताल के डॉक्टर्स और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन भी वीसी के जरिये इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे.

भारत में दुनिया का सबसे बड़ा Covid-19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होगा

प्रधानमंत्री मोदी वैक्सीन (Corona Vaccine) को समर्पित करने के दौरान देश के नागरिकों को संबोधित भी कर सकते हैं. फिलहाल आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की रूपरेखा को तैयार करने में स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय लगा हुआ है, जो शुक्रवार को जारी किया जाएगा.

मुरैना जहरीली शराब (poisonous Liquor) कांड में अब तक 24 की मौत, एसआईटी करेगी जाँच।

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मध्य प्रदेश के मुरैना में जहरीली शराब (poisonous Liquor) पीने से हुई मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां हो रही मौतों का सिलसिला सोमवार (11 जनवरी) को शुरू हुआ था। अब तक 24 लोग जान गंवा बैठे हैं। राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए मुरैना के कलेक्टर व एसपी को हटाने के साथ ही बागचीनी थाने के सारे स्टाफ को लाइन अटैच कर दिया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है।

मामले की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को दिल्ली दौरा रद्द कर दिया था। उन्होंने तुरंत ही अफसरों की एक बैठक बुलाई। इसमें गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा व संभाग के अफसर शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने जहरीली शराब (poisonous Liquor) के गोरखधंधे को लेकर सभी अफसरों से कई सवाल किए और जवाब न मिलने पर जमकर उनकी फटकार लगाई। 

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चौहान ने जब मुरैना के कलेक्टर अनुराग वर्मा और एसपी अनुराग सुजानियां से शराब कांड (poisonous Liquor) के बारे में पूछताछ की तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा, ‘दिखवाते हैं।’ इस बात पर नाराज हुए सीएम ने दोनों अफसरों को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश दे दिए। शिवराज सरकार ने वर्मा को उनके पद से हटाने के बाद अस्थायी रूप से अगले आदेश तक के लिए मंत्रालय में उप सचिव बनाया है। सुजानियां को पीएचक्यू में भेज दिया गया। वहीं, एसडीओपी सुजीत भदौरिया को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा बागचीनी थाने के पूरा स्टाफ लाइन अटैच है।  

इतना ही नहीं शिवराज सरकार ने घटना की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन भी किया है। एसआईटी की इस टीम में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, एडीजी ए. सांई मनोहर और डीआईजी मिथिलेश शुक्ला शामिल होंगे। ये टीम गुरुवार यानी आज से जांच शुरू करेगी। साथ ही भोपाल में सेनानी 25वीं वाहिनी विसबल के सुनील कुमार पांडे को एसपी पदस्थ किया गया है। 

इस बीच, घटना की जांच के लिए गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) राजेश राजौरा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जिले के मानपुर गांव पहुंच गई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पुलिस उपमंडल अधिकारी (एसडीओपी) सुजीत भदरा को भी राज्य सरकार ने इस मामले में निलंबित कर दिया है। वहीं इस घटना के बाद सरकार ने बी कार्तिकेयन को मुरैना जिले का कलेक्टर तथा सुनील कुमार पांडे को एसपी नियुक्त किया है।

उधर, चंबल रेंज के डीआईजी राजेश हिंगणकर ने बृहस्पतिवार को बताया कि जहरीली शराब (poisonous Liquor) मामले में चार और व्यक्तियों के दम तोड़ देने के बाद इसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इस मामले में 15 बीमार लोगों का उपचार अब ग्वालियर और मुरैना के सरकारी अस्पतालों में चल रहा है। 

House Tax वसूली के लिए चलेगा अभियान, बकाया न चुकाने पर कुर्क होगी संपत्ति

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Faridabad: संपत्ति कर (House Tax) न देने वालों की संपत्ति अब कुर्क की जाएगी। नगर निगम कमिश्नर ने बकाया वसूलने का अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। जो बकाया नहीं चुकाएगा, उसकी संपत्ति कुर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ऐसे लोगों के पानी व सीवरेज के कनेक्शन भी काटे जाएंगे। इसके लिए निगम कमिश्नर यशपाल यादव के साथ टैक्सेशन ब्रांच की मीटिंग हुई है।

निकिता मामले में नाराज भीड़ ने पुलिस पर किया पथराव

नगर निगम को 9400 बड़े बकायेदारों से 218 करोड़ रुपये का टैक्स (House Tax) वसूल करना है। निगम प्रशासन कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने में कठिनाइयों का सामना कर रहा है। कमिश्नर ने आदेश दिए हैं कि इन सभी को नोटिस भेजना शुरू किया जाए।

ग्रामीण, किसान की लाश लेकर पहुंचे Bank, दाह संस्कार के लिए माँगे पैसे।

 टैक्स छूट का लाभ 31 मार्च तक

निगमायुक्त ने बताया कि हरियाणा सरकार, शहरी स्थानीय निकाय विभाग की नीति के अनुसार 2020-21 के संपत्ति कर (House Tax) की राशि जमा करने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। साथ ही जिन संपत्ति करदाताओं ने पिछले 3 साल में प्रत्येक वर्ष अपना संपत्ति कर निर्धारित तिथि 31 जुलाई से पहले जमा कराया है, उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी। वर्ष 2010-11 से वर्ष 2016-17 तक के बकाया मूल संपत्ति कर (House Tax) पर 25 प्रतिशत की छूट देने और एकमुश्त बकाया संपत्ति कर की अदायगी करने पर पूरा ब्याज माफ करने का प्रावधान किया गया है। यह सभी छूट 31 मार्च तक संपत्ति कर (House Tax) जमा करने वाले करदाताओं को ही मिलेगी।

घर बैठे जमा करें टैक्स

कमिश्नर यशपाल यादव ने करदाताओं से अपील की है कि कोविड-19 के चलते टैक्स (House Tax) ऑनलाइन जमा करवाएं। इसके लिए online.ulbharyana.gov.in/eforms/PropertyTax.aspx पर जाकर आवश्यक कॉलम भरें। केवल ओल्ड प्रॉपर्टी आईडी के कॉलम में पिछले सालों की संपत्तिकर की रसीद पर 13 अक्षरों की अंकित अपनी प्रॉपर्टी आईडी भरें। ओल्ड प्रॉपर्टी आईडी भरने का विकल्प चुनने वाले करदाताओं को दूसरे कॉलम भरने की आवश्यकता नहीं है।

Farm Laws: SC द्वारा बनाई गयी समिति से भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को अलग किया

New Delhi: नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसान आंदोलन (Farmers Protest) का आज (गुरुवार) 50वां दिन है. आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई के दौरान समाधान के लिए एक समिति का गठन किया था. कमेटी के सदस्‍यों में भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष भूपिंदर सिंह मान (Bhupinder Singh Mann) भी थे. अब उन्होंने समिति से अपना नाम वापस ले लिया है. दरअसल कमेटी में भूपिंदर मान के नाम पर शुरुआत से ही बवाल हो रहा था. किसान नेताओं का कहना था कि मान पहले ही तीनों नए कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं.

किसानों ने लोहड़ी पर्व पर नये कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया।

भूपिंदर सिंह मान ने पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी. मान ने इस कमेटी में उन्हें शामिल करने के लिए शीर्ष अदालत (Supreme Court) का आभार जताया. पत्र में उन्होंने लिखा है कि वे हमेशा पंजाब और किसानों के साथ खड़े हैं. एक किसान और संगठन का नेता होने के नाते वह किसानों की भावना जानते हैं. वह किसानों और पंजाब के प्रति वफादार हैं. किसानों के हितों से कभी कोई समझौता नहीं कर सकता. वह इसके लिए कितने भी बड़े पद या सम्मान की बलि दे सकते हैं. मान ने पत्र में लिखा कि वह कोर्ट की ओर से दी गई जिम्मेदारी नहीं निभा सकते, अतः वह खुद को इस कमेटी से अलग करते हैं.

26 जनवरी को बड़े आंदोलन की तैयारी में किसान, पंजाब में हजारों वॉलंटियर जुड़े

किसान नेताओं ने समिति में शामिल अन्य नामों पर भा ऐतराज जताया था. शीर्ष अदालत की तरफ से बनाई गई चार सदस्यों की समिति में BKU के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष अनिल घनवत, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं. अनिल घनवत ने मीडिया में लिखे अपने लेखों में किसान कानूनों के पक्ष में राय दी थी.

सरकार वापस नहीं लेगी कृषि कानून, सीएम मनोहर लाल खट्टर

बता दें कि कई जाने-माने कृषि अर्थशास्त्रियों ने नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को लागू करने पर रोक लगाने तथा सरकार और आंदोलनकारी किसान संगठनों के बीच उन कानूनों को लेकर जारी गतिरोध दूर कराने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किए जाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था. पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री वाई के अलघ ने कहा था कि उन्हें लगता है कि  उच्चतम न्यायालय का यह फैसला बहुत विवेकपूर्ण है.