Mamata Banerjee की “डेमोक्रेसी बचाओ” लड़ाई में उतरे Sanjay Raut, ट्रंप को लिखा पत्र बना सियासी तूफान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच Sanjay Raut ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को लिखे गए अपने संदेश को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम में चुनावी प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखना उनका “फ़र्ज़” था।

“डेमोक्रेसी बचाने की लड़ाई”

Sanjay Raut ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, लेकिन यहां चुनावी प्रक्रियाओं और संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय बलों की भूमिका को लेकर चिंता जता रहे हैं।

राउत ने कहा कि Rahul Gandhi, Uddhav Thackeray और Mamata Banerjee पहले भी इन मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ किसी एक पार्टी की लड़ाई नहीं बल्कि “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई” है।

उन्होंने कहा कि Mamata Banerjee इस संघर्ष को आगे बढ़ाएंगी और विपक्षी दल उनके साथ खड़े रहेंगे। राउत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे ने भी ममता बनर्जी से बात की है और विपक्षी एकता को मजबूत करने पर चर्चा हुई है।

ट्रंप को लिखे संदेश पर सफाई

संजय राउत ने कहा कि मीडिया में यह खबर आई थी कि डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों पर प्रधानमंत्री Narendra Modi को बधाई दी थी। इसी के बाद उन्होंने ट्रंप को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर संदेश लिखा।

राउत ने कहा कि उनका उद्देश्य यह बताना था कि भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में डर, दबाव और संस्थागत पक्षपात के आरोप लगे हैं। उनके मुताबिक, कई विपक्षी दलों का मानना है कि चुनाव आयोग ने पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से काम नहीं किया।

उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती ने लोगों के बीच भरोसा पैदा करने के बजाय दबाव का माहौल बनाया। राउत ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद हों।

Sanjay Raut ने तमिलनाडु और राज्यपालों की भूमिका पर किए सवाल

संजय राउत ने तमिलनाडु की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभवन में बैठे लोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए। राउत ने कहा कि अगर किसी पार्टी के पास 108 विधायक हैं, तो उसे बहुमत साबित करने का मौका विधानसभा में मिलना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव के जरिए सत्ता का फैसला किया जाए।

Mamata Banerjee का रुख और राजनीतिक टकराव

इस बीच, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनावी हार के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर दबाव और धांधली हुई।

Mamata Banerjee ने काउंटिंग प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

Mamata Banerjee ने दावा किया कि भाजपा को “नैतिक जीत” नहीं मिली है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्यभर में तृणमूल कांग्रेस के 1500 से अधिक कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया।

दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को खारिज कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है और विपक्ष हार स्वीकार नहीं कर पा रहा।

पश्चिम Bengal के चुनाव नतीजों के बाद अब राजनीतिक लड़ाई केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनाव प्रक्रिया और विपक्षी एकता को लेकर भी राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुकी है।

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