TMC में घमासान: बागी गुट के मुख्यालय पर कब्ज़े से बढ़ा सियासी संकट, दिलीप घोष बोले- “यह पार्टी का अंदरूनी मामला”

पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक बागी गुट द्वारा पार्टी के राज्य मुख्यालय पर कब्ज़ा करने का दावा किया गया। इस घटनाक्रम ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर चल रहे कथित सत्ता संघर्ष को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने पूरे विवाद को TMC का “अंदरूनी मामला” बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यालय और विधानसभा सीटों के स्वामित्व से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय कानून और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिया जाएगा।
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“यह TMC का अंदरूनी मामला है”: दिलीप घोष
मीडिया से बातचीत करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार की घटनाएं उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “यह TMC का अंदरूनी मामला है। TMC पार्टी कार्यालय या विधानसभा सीटों पर किसका अधिकार होगा, इसका फैसला स्पीकर और कानून के अनुसार होगा। लेकिन इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो सरकार को दिशा देने और सुशासन सुनिश्चित करने का कार्य करता है।”
अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना
दिलीप घोष ने इस दौरान TMC नेता अभिषेक बनर्जी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान दिए गए कुछ कथित भड़काऊ बयानों ने राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को हिंसा का सामना करना पड़ा और कई परिवारों के घर तक तबाह हो गए। घोष ने कहा, “ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।”
पार्टी मुख्यालय के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
यह विवाद उस समय और गंभीर हो गया, जब शुक्रवार को कोलकाता स्थित पार्टी के मेट्रोपॉलिटन स्टेट ऑफिस के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और कोलकाता पुलिस की भारी तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था उस समय बढ़ाई गई, जब दावा किया गया कि विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय पर कब्ज़ा कर लिया है।
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बताया जा रहा है कि यह घटनाक्रम उस दिन सामने आया, जब असंतुष्ट गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और फंड पर दावा पेश किया। बागी गुट ने कथित तौर पर 28 साल पुरानी पार्टी की पहचान और संगठनात्मक ढांचे पर अपना अधिकार जताया है।
मुख्यालय पर कब्ज़े का दावा और नेतृत्व पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, रीताब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, जावेद खान और अखरुज्जमां सहित कई नेताओं ने 2022 से पार्टी के मुख्य राजनीतिक केंद्र माने जाने वाले ईएम बाईपास स्थित कार्यालय पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। इस दौरान कार्यालय के बाहर लगे साइनेज बदले गए और ममता बनर्जी के स्थान पर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन घोषित करने वाले बैनर भी लगाए गए।
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बागी गुट का दावा है कि भवन की पूर्व लीज समाप्त हो चुकी थी और उनकी कार्यकारी समिति के तहत एक नया समझौता किया गया है।
“यह हमारा पार्टी कार्यालय है”
विधायक अखरुज्जमां ने कहा, “यह हमारा पार्टी कार्यालय है और आगे भी हमारा ही रहेगा। मुख्य द्वार की चाबी हमारे पास रहेगी। हम ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं, लेकिन वर्तमान नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते।”
इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी के समर्थक गुट में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस में आपात शिकायतें दर्ज कराईं।
अब चुनाव आयोग पर टिकी निगाहें
दूसरी ओर, कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय के स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद ही वहां नियमित राजनीतिक गतिविधियों को फिर से अनुमति दी जाएगी।
अब इस राजनीतिक संघर्ष का केंद्र नई दिल्ली बन गया है। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी समर्थक गुट और रीताब्रत बनर्जी गुट दोनों को निर्देश दिया है कि वे 6 जुलाई को शाम 5:30 बजे तक अपने-अपने संगठनात्मक दावे और प्रतिदावे से संबंधित सभी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आयोग का आगामी निर्णय पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
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