“Jagdeep Dhankhar की सोच भाजपा को रास नहीं आई”: गोविंद सिंह डोटासरा

धनखड़ ने उस प्रयास को खारिज करते हुए इसकी तुलना "जंग लगे सब्जी काटने वाले चाकू से बाईपास सर्जरी" करने जैसी असंगत कोशिश से की थी।

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। डोटासरा ने कहा कि जब एक ओर वे लगातार राज्यसभा की कार्यवाही चला रहे थे और 23 जुलाई को जयपुर दौरे की तैयारी कर रहे थे, तब स्वास्थ्य कारणों का हवाला संदेह पैदा करता है।

Jagdeep Dhankhar का इस्तीफा: क्या न्यायपालिका पर सवाल उठाना पड़ा भारी?

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दिनों धनखड़ द्वारा दिए गए बयान—जिनमें उन्होंने विपक्ष को दुश्मन न मानने की बात कही थी—शायद भाजपा नेतृत्व को स्वीकार्य नहीं थे।

उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे पर डोटासरा ने उठाए सवाल

डोटासरा ने कटाक्ष करते हुए कहा, “भाजपा अब ‘हम दो, हमारे दो’ वाली पार्टी बन गई है, जहां जो उनके नजरिए से सहमत नहीं होता, उसे हाशिए पर डाल दिया जाता है।” उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और कहा कि एक दिन सच जरूर सामने आएगा कि धनखड़ का इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से था या फिर वैचारिक मतभेद के कारण।

Jagdeep Dhankhar ने दिया इस्तीफा

उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने पत्र में कहा कि उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू होगा। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें भारत के “परिवर्तनकारी युग” की सेवा का अवसर मिला, जो उनके लिए एक “सच्चा सम्मान” रहा।

"BJP did not like Jagdeep Dhankhar's thinking": Govind Singh Dotasara

धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब वे अपने स्पष्ट और मुखर रवैये के लिए लगातार चर्चा में रहे। राज्यसभा की कार्यवाही के संचालन में विपक्ष के प्रति उनकी कड़ी टिप्पणियाँ और न्यायपालिका पर सार्वजनिक आलोचना ने उन्हें एक टकरावपूर्ण उपराष्ट्रपति के रूप में स्थापित किया। उनके कार्यकाल के दौरान विपक्ष ने उनके खिलाफ महाभियोग लाने का प्रयास भी किया था, जो भले ही विफल रहा, लेकिन यह अपने आप में एक ऐतिहासिक उदाहरण है।

धनखड़ ने उस प्रयास को खारिज करते हुए इसकी तुलना “जंग लगे सब्जी काटने वाले चाकू से बाईपास सर्जरी” करने जैसी असंगत कोशिश से की थी। 2022 में उन्होंने मार्गरेट अल्वा को 74.37% मतों से हराकर भारी जीत दर्ज की थी — यह जीत 1992 के बाद सबसे बड़े अंतर वाली उपराष्ट्रपति चुनावी जीत मानी जाती है।

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