Indore में हुई मौतों को लेकर चल रहे विवाद के बीच BJP सांसद ने कहा स्वच्छ जल ‘जनता की जिम्मेदारी’ है।
भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री इस "दुर्भाग्यपूर्ण" स्थिति पर नजर रख रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के उस बयान ने, जिसमें उन्होंने स्वच्छ जल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाली है, इंदौर (Indore) के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत के बाद शुरू हुए राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।
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Indore की घटना से सबक लेना चाहिए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इंदौर त्रासदी के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र खंडवा में कोई विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, तो पाटिल ने कहा, “खंडवा हो, नगर परिषद हो या ग्राम पंचायत, सभी को इंदौर की घटना से सबक लेना चाहिए।
जनता की भी जिम्मेदारी है
यह मान लेना सही नहीं है कि सरकार सब कुछ करेगी। जनता की भी जिम्मेदारी है। हमने लगातार निर्देश दिए हैं कि पानी की टंकियों और स्रोतों को साफ किया जाए। स्वच्छ जल हमारे प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प है और हर घर में नल लगाए जा रहे हैं। अगर कोई कमी है, तो हम सभी को एक साथ बैठकर प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहिए और उसका समाधान करना चाहिए।”

जब उनसे कहा गया कि Indore के लोगों ने प्रशासन को पानी की गुणवत्ता के बारे में बार-बार सूचित किया था और फिर भी यह घटना घटी, तो पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री इस “दुर्भाग्यपूर्ण” स्थिति पर नजर रख रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सत्ताधारी पार्टी पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया। गुप्ता ने कहा, “ज्ञानेश्वर पाटिल को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या नालियों की सफाई भी जनता की जिम्मेदारी है, क्या अस्पतालों में एक्सपायर्ड दवाओं की पहचान करना भी जनता का काम है। अगर पीने के पानी की सफाई भी जनता की जिम्मेदारी है, तो सरकार को हमारा टैक्स का पैसा वापस करना चाहिए। सरकार टैक्स क्यों वसूलती है?”
सांसद की टिप्पणियों को “गैरजिम्मेदाराना” बताते हुए गुप्ता ने चेतावनी दी कि जब तक भाजपा अपना रुख स्पष्ट नहीं करती, पार्टी को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ेगा।
इस संकट ने इंदौर को बुरी तरह प्रभावित किया, जो पिछले आठ वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार रहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने प्रशासनिक दिशानिर्देश जारी किए और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की।
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