TMC में बढ़ा सियासी संकट, Mamata Banerjee पर FIR और पार्टी में बगावत के बीच विपक्ष का समर्थन

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असहमति, मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ दर्ज FIR और पार्टी के कई नेताओं के बागी रुख ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। इसी बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने Mamata Banerjee का खुलकर समर्थन करते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR पर सवाल उठाए हैं और कार्रवाई को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जाने का आरोप लगाया है।

रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि यदि भड़काऊ भाषणों के आधार पर राजनीतिक नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है, तो ऐसे मामलों में सभी नेताओं के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली चुनाव के दौरान दिए गए कथित विवादित बयानों पर कुछ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

राउत ने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में कई राजनीतिक नेता विवादित बयान देते हैं, लेकिन उनके खिलाफ उसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं होती जैसी विपक्षी नेताओं के खिलाफ की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष और समान रूप से होना चाहिए।

Mamata Banerjee को मिला विपक्ष का समर्थन

शिवसेना (UBT) नेता ने Mamata Banerjee को एक मजबूत और संघर्षशील नेता बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की जा रही है। राउत ने कहा, “ममता बनर्जी एक लड़ाकू नेता हैं। उन्हें FIR या राजनीतिक दबाव से डराया नहीं जा सकता। विपक्षी दल उनके साथ खड़े हैं।”

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ कोलकाता पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने आरोप लगाया है कि 9 मार्च को दिए गए एक सार्वजनिक भाषण में ममता बनर्जी ने ऐसे बयान दिए जो सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते थे।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और शिकायत की जांच जारी है।

TMC में बढ़ रही अंदरूनी नाराजगी

Mamata Banerjee के खिलाफ FIR का मामला ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। चुनावी झटके के बाद पार्टी में नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं और कई विधायक तथा सांसद खुले तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, विधानसभा में बागी विधायकों के एक बड़े समूह ने अलग पहचान बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। वहीं पार्टी के कुछ सांसदों ने भी लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है।

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बताया जा रहा है कि लगभग 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क करने का फैसला किया है और वे खुद को “असली TMC” का प्रतिनिधि बता रहे हैं। इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर गहराते संकट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राज्यसभा और लोकसभा में असर

पार्टी के भीतर असंतोष का असर संसद तक पहुंच गया है। हाल के दिनों में तीन सांसदों के राज्यसभा से इस्तीफा देने की खबरें सामने आई हैं, जबकि लोकसभा में भी अलग समूह की मांग ने TMC नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह असंतोष आगे बढ़ता है, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।

Abhishek Banerjee मामले में जांच जारी

इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID की जांच भी जारी है। हाल ही में जांच एजेंसी की टीम उनके आवास तक पहुंची थी, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

हालांकि, भाजपा नेता और सांसद सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह पूरी तरह एक कानूनी प्रक्रिया है और जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में शिकायत दर्ज हुई है तो कानून के अनुसार जांच होना स्वाभाविक है।

पश्चिम बंगाल में FIR, CID जांच और TMC के भीतर बढ़ती बगावत ने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और बागी नेताओं के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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