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भ्रष्‍टाचार के आरोपों का सामना कर रहे Anil Deshmukh, मुख्यमंत्री Uddhav Thackeray से मिले

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने मंगलवार रात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की

मुंबई: भ्रष्टाचार के आरोपी महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) जिनके इस्तीफे की मांग विपक्षी भाजपा (BJP) ने की है, ने मंगलवार रात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली बैठक श्री ठाकरे के आधिकारिक आवास पर हुई।

इससे पहले आज केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) पर तीखा हमला किया, लोकसभा और राज्यसभा में भी इस मसले को उठाया गया जहाँ भाजपा के कई सांसदों ने इस मामले को बहुत ही गम्भीर बताया और कई सवाल किए। भाजपा के कई सदस्यों ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के इस्तीफ़े की भी माँग की।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह (Param Bir Singh) द्वारा श्री देशमुख पर आरोप लगाया गया है – मुकेश अंबानी बम कांड मामले में गिरफ्तार अधिकारी सचिन वज़े सहित अन्य पुलिस कर्मियों की मदद से जबरन वसूली रैकेट चला रहे हैं। उन्हें कथित तौर पर प्रति माह 100 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था।

मंत्री चाहते थे 100 करोड़ रुपया महीना, मुंबई पूर्व कमिश्नर (Param Bir Singh) ने लगाए आरोप

जब पुलिस अधिकारी (Param Bir Singh) को मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से हटाया गया था तो श्री देशमुख ने कहा था कि पुलिस प्रमुख के तहत मुकेश अंबानी की सुरक्षा जांच में कुछ “अक्षम्य” खामियां सामने आई थीं। 

ग़ौरतलब है कि श्री सिंह (Param Bir Singh) को भारत के सबसे अमीर व्यक्ति रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी एक कार के मामले में गिरफ्तार पुलिस अधिकारी सचिन वजे (Sachin Vaze) के खिलाफ जांच के नतीजे में होम गार्ड में स्थानांतरित किया गया था।

श्री देशमुख का अब तक उनकी पार्टी – राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने डटकर बचाव किया है, जो शिवसेना की अगुवाई वाली महा विकास समिति का हिस्सा है, जो राज्य में सत्ता में है। वहीं श्री पवार ने कहा “गृह मंत्री के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। ऐसे आरोप लगाए गए थे कि गृह मंत्री ने पुलिस को 100 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। पैसे के वास्तविक लेन-देन की कोई जानकारी नहीं है। गृह मंत्री या उनके कर्मचारियों को हस्तांतरित किए जा रहे किसी भी पैसे की कोई जानकारी नहीं है।”  

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अपने गृह मंत्री पर लगे गंभीर आरोपों के चलते उद्धव ठाकरे सरकार निश्चित रूप से दबाव में है.