वेलफेयर स्कीम्स पर सियासत, Asaduddin Owaisi बोले- यह अधिकार है, एहसान नहीं

पश्चिम बंगाल में कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और उन्हें मिलने वाले लाभों को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। Asaduddin Owaisi ने राज्य सरकार की उस नीति पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कथित तौर पर वेलफेयर योजनाओं के लाभों को वोटर लिस्ट से जोड़ा जा रहा है। उनका आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर सूची से बाहर किए गए कई लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन और अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है।

वोटर लिस्ट से जोड़ने पर Asaduddin Owaisi ने उठाए सवाल

Asaduddin Owaisi ने कहा कि जिन लोगों को “एब्सेंट” या “शिफ्टेड” के रूप में चिह्नित किया गया है, या जिन्हें पिछले चुनावों के दौरान वोटर स्लिप नहीं मिली थी, उनमें से कई वास्तविक मतदाता हैं। Asaduddin Owaisi ने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति को राशन या अन्य सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए वोटर सूची में नाम होना क्यों आवश्यक बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि वोटर सूची को ही पात्रता का आधार बनाया जा रहा है तो आधार आधारित सत्यापन प्रणाली का महत्व कम हो जाता है।

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उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं किसी राजनीतिक दल या नेता की व्यक्तिगत कृपा नहीं हैं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे से संचालित होती हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह कदम लाभार्थियों की संख्या कम करने का प्रयास प्रतीत होता है, जिसका असर सबसे अधिक गरीब वर्गों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों और मुस्लिम समुदाय पर पड़ सकता है।

‘सरकारी योजनाएं किसी की निजी चैरिटी नहीं’: Asaduddin Owaisi

AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने राज्य सरकार से इस नीति को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी पात्र नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। Asaduddin Owaisi ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार ऐसे व्यवहार कर रही है जैसे ये योजनाएं किसी नेता की निजी चैरिटी हों, जबकि इनका वित्तपोषण जनता के पैसे से होता है और इन पर हर पात्र नागरिक का अधिकार है।

दिलीप घोष का TMC पर भ्रष्टाचार का आरोप

इस बीच भाजपा नेता दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का संगठन धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और उसके कई नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग किया है।

घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में “ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है” और जनता के लिए निर्धारित धन को गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने गरीबों के अधिकारों का हनन किया है, उन्हें कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

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नागरिकता और योजनाओं की पात्रता पर बहस

लक्ष्मी भंडार और अन्नपूर्णा भंडार जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि इनका लाभ केवल भारतीय नागरिकों को मिलना चाहिए। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने का कानूनी रास्ता उपलब्ध है।

घोष ने लोगों से नागरिकता संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करने और स्वयं को पंजीकृत कराने की अपील की ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता का प्रश्न केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सरकारी सुविधाओं की पात्रता से भी जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है

पश्चिम बंगाल में वेलफेयर योजनाओं, नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े इन मुद्दों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर ओवैसी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा तृणमूल कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और लाभार्थियों के अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप लगा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक महत्वपूर्ण बन सकता है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर नागरिकता, मतदान अधिकार और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जैसे संवेदनशील विषय जुड़े हुए हैं।

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