GST 2.0 आहार संबंधी Health को नुकसान पहुंचा सकता है?
जीएसटी 2.0 जहां आम आदमी को आर्थिक राहत देता है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे खानपान की आदतों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली: देश में 22 सितंबर से लागू होने जा रहे GST 2.0 के तहत रोज़मर्रा की कई खाद्य वस्तुएँ सस्ती हो जाएंगी। सरकार ने टैक्स ढांचे को सरल बनाते हुए इसे दो मुख्य स्लैब — 5% और 18% में बांटा है, जबकि 40% का विशेष टैक्स स्लैब तंबाकू, पान मसाला, एरेटेड ड्रिंक और अल्ट्रा-लक्ज़री वस्तुओं पर लागू होगा।
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क्या हुआ सस्ता?

पिज़्ज़ा ब्रेड पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा चॉकलेट, कैंडी, जैम, जेली जैसे शुगर-बेस्ड उत्पाद, जो पहले 12–18% टैक्स स्लैब में आते थे, अब केवल 5% टैक्स पर मिलेंगे। डेयरी उत्पाद जैसे दूध, पनीर और मक्खन पर भी टैक्स घटकर 0% हो गया है।
GST 2.0 का स्वास्थ्य का स्वास्थ्य पर प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि इस टैक्स कटौती से प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ सकती है, जिससे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।
क्या हुआ महंगा?

इसके विपरीत, सॉफ्ट ड्रिंक और अन्य एरेटेड पेय पदार्थों पर टैक्स बढ़ाकर 40% कर दिया गया है, ताकि अस्वास्थ्यकर पेयों की खपत को हतोत्साहित किया जा सके।
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