West Bengal में UCC पर सियासत तेज, समिक भट्टाचार्य बोले- “एक देश, एक कानून पूरे भारत की मांग”

West Bengal में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के West Bengal प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को स्पष्ट किया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड पार्टी के गठन के समय से ही उसके घोषित एजेंडे का हिस्सा रहा है और इसे लागू करना भाजपा की वैचारिक और राजनीतिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि “एक देश, एक कानून” की अवधारणा पूरे भारत की जनता की मांग बन चुकी है और पार्टी अपने इस वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ANI से बातचीत के दौरान समिक भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने शुरू से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड को अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल किया है। उन्होंने दावा किया कि समाज के विभिन्न वर्गों, यहां तक कि अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग भी UCC का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी होती है और भाजपा के लिए यह केवल एक राजनीतिक वादा नहीं बल्कि एक वैचारिक प्रतिबद्धता है।

West Bengal विधानसभा में UCC पर चर्चा की तैयारी

समिक भट्टाचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब West Bengal विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026 समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने जा रही है। इनमें West Bengal पिछड़ा वर्ग आरक्षण संशोधन विधेयक, West Bengal पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक, पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था संरक्षण संशोधन विधेयक और सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण संबंधी विधेयक भी शामिल हैं।

भाजपा द्वारा विधानसभा चुनावों में किए गए वादों के बाद से ही UCC West Bengal की राजनीति का एक अहम मुद्दा बना हुआ है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर राज्य में उनकी सरकार बनती है तो UCC को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

BJP का दावा- हर भाजपा शासित राज्य में लागू होगा UCC

इससे पहले भी समिक भट्टाचार्य ने कहा था कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में आएगी, वहां यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी पार्टी के इस रुख का समर्थन करते हुए कहा था कि यह भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा है और इसे लागू करना पार्टी की प्राथमिकता है।

यह राजनीतिक बयानबाजी उस समय और तेज हो गई जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि West Bengal में UCC लागू करने की प्रक्रिया गुजरात, उत्तराखंड और असम जैसे राज्यों के मॉडल के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया था कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो प्रस्तावित कानून के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है। इस समिति की रिपोर्ट विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

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TMC में अंदरूनी कलह पर भाजपा का हमला

यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे के अलावा समिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे विवादों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने बागी नेता रीताब्रत बनर्जी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस अंदर से टूट चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस कभी एक वैचारिक राजनीतिक दल नहीं रही, बल्कि अवसरवादी लोगों का समूह रही है, जो सत्ता के लिए एकजुट हुआ था। भट्टाचार्य ने कहा कि अब पार्टी के भीतर ही नेता एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे हैं और जो मतभेद पहले छिपे हुए थे, वे अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

TMC में बगावत और नए राजनीतिक समीकरण

दरअसल, TMC सांसद डोला सेन ने कोलकाता के प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक संचार सामग्री प्रसारित कर रहे हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक गुट ने खुद को “असली तृणमूल” बताते हुए नई नेतृत्व संरचना की घोषणा की। इस गुट ने अरूप रॉय को अपना अध्यक्ष नियुक्त किया और 30 सदस्यों वाली राष्ट्रीय कार्य समिति का गठन किया। इस गुट ने दावा किया कि उसे 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी का मार्गदर्शक बनाए रखने की बात भी कही गई है।

इसी बीच, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 तृणमूल सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा कर West Bengal की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दे दिया है। ऐसे में UCC के मुद्दे के साथ-साथ TMC की अंदरूनी राजनीति भी राज्य की सियासत का केंद्र बनती जा रही है

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