Dabolim Airport के निजीकरण पर Sanjay Singh का केंद्र सरकार पर हमला, रोजगार पर खतरे का दावा

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने केंद्र सरकार पर देश की सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लगातार देश के महत्वपूर्ण सेक्टरों को निजी कंपनियों को देने की दिशा में काम कर रही है, जिससे आम लोगों के रोजगार और आर्थिक सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा है।

Sanjay Singh ने विशेष रूप से गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट के संभावित निजीकरण को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस एयरपोर्ट को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी कर रही है। उनके अनुसार इस एयरपोर्ट से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है और यदि इसका निजीकरण किया गया तो बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट से जुड़े कर्मचारियों, स्थानीय व्यापारियों और सेवा क्षेत्र के लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

Sanjay Singh ने सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया

AAP सांसद Sanjay Singh ने दावा किया कि सरकार देश की संपत्तियों को बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बेच रही है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे, रेलवे, बंदरगाह और अन्य सरकारी संस्थान देश की जनता की संपत्ति हैं और इन्हें निजी कंपनियों को सौंपना जनता के हितों के खिलाफ है। संजय सिंह ने कहा कि सरकार को इन संस्थानों को मजबूत बनाने और रोजगार बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि निजीकरण के जरिए इन्हें बेचने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की इस नीति से युवाओं के रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं और आर्थिक असमानता बढ़ सकती है। संजय सिंह ने कहा कि देश की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने से सरकारी नियंत्रण कम हो जाएगा और आम जनता को महंगी सेवाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

Sanjay Singh ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस फैसले का कड़ा विरोध करती है और इसे संसद से लेकर जनता के बीच उठाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से डाबोलिम एयरपोर्ट के निजीकरण के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार का पहला दायित्व जनता के हितों और रोजगार की सुरक्षा करना है।

AAP नेता ने कहा कि यदि सरकार ऐसे फैसले लेती रही तो इसका असर देश की आर्थिक व्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जनता को पारदर्शिता के साथ बताया जाना चाहिए कि इस तरह के निजीकरण से देश और नागरिकों को क्या वास्तविक लाभ होगा।

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