दक्षिण कोरिया में Trump and Xi मुलाकात: अमेरिका-चीन तनाव में कमी के संकेत, दोनों नेताओं ने ‘शानदार समझौते’ की उम्मीद जताई

दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई इस ऐतिहासिक मुलाकात में दोनों देशों के नेताओं ने व्यापारिक मतभेदों को दूर करने, आपसी समृद्धि बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर ज़ोर दिया।

सियोल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति Xi jinping के बीच गुरुवार को दक्षिण कोरिया में हुई उच्च-स्तरीय वार्ता में दोनों नेताओं ने व्यापारिक तनाव घटाने और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की इच्छा ज़ाहिर की। यह मुलाकात दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच महीनों से चल रही उथल-पुथल के बाद संबंधों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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वार्ता के बाद ट्रंप ने शी जिनपिंग को “कठोर वार्ताकार” बताते हुए कहा कि उनके साथ “बहुत अच्छे संबंध” हैं। ट्रंप ने कहा, “हमारी मुलाकात बहुत सफल रहने वाली है। वह बहुत ही सख़्त वार्ताकार हैं, यह अच्छी बात नहीं है। हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं। हमारे बीच हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चीन के प्रतिष्ठित और आदरणीय राष्ट्रपति के साथ होना मेरे लिए सम्मान की बात है। हम पहले ही कई मुद्दों पर सहमत हो चुके हैं और अभी कुछ और मुद्दों पर सहमत होंगे। मुझे विश्वास है कि लंबे समय तक हमारे बीच शानदार संबंध रहेंगे।”

Xi jinping का रुख:

Trump and Xi meet in South Korea
Xi jinping

चीनी राष्ट्रपति Xi jinping ने भी मुलाकात के दौरान सकारात्मक संकेत दिए और कहा कि “टकराव होना स्वाभाविक है,” लेकिन दोनों देशों को एक मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए साझेदारी और मित्रता का मार्ग अपनाना चाहिए।

शी ने कहा, “विविधताओं, उतार-चढ़ावों और चुनौतियों का सामना करते हुए, चीन-अमेरिका संबंधों के शीर्ष पर हमें सही रास्ते पर चलते रहना चाहिए और इन संबंधों के विशाल जहाज़ को स्थिर रूप से आगे बढ़ाना सुनिश्चित करना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि चीन का विकास ट्रंप के “अमेरिका को फिर से महान बनाओ” (Make America Great Again) के दृष्टिकोण के अनुरूप है और दोनों देश एक-दूसरे की समृद्धि में मदद कर सकते हैं।

शी ने स्पष्ट किया, “इतिहास ने हमें यही सिखाया है कि चीन और अमेरिका को साझेदार और मित्र होना चाहिए।”

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विश्लेषण: यह बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक नीतियों, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर लंबे समय से तनाव बना हुआ था। हालांकि इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं द्वारा दिए गए बयानों से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका और चीन संबंधों के “रिसेट” की दिशा में बढ़ रहे हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वार्ता के परिणामस्वरूप कोई ठोस समझौता होता है, तो यह वैश्विक बाजारों और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक “सकारात्मक मोड़” साबित हो सकता है।

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